गायत्री माँ का प्रेरणादायक भजन | मन शक्ति और सत्य के मार्ग का आशीर्वाद | Gayatri Havan Bhajan
Автор: Bhakti Connect
Загружено: 2026-02-12
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यह प्रेरणादायक भजन दिव्य शक्ति से मनोबल प्राप्त करने की प्रार्थना है।
यह भजन साधक को आंतरिक दुर्बलताओं पर विजय पाने तथा सत्य और धर्म के मार्ग पर निर्भयता से चलने की प्रेरणा देता है।
यह पावन हिंदी भजन प्रायः गायत्री हवन के समापन पर गाया जाता है।
गायत्री माँ की कृपा से जीवन में शांति, शक्ति और सकारात्मकता प्राप्त हो।
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Please see below the Lyrics of this Bhajan:
Yagya Roop Prabho Hamare – Hindi Lyrics
॥ यज्ञ महिमा ॥
यज्ञ रूप प्रभो हमारे, भाव उज्ज्वल कीजिए।
छोड़ देंवे छल कपट को, मानसिक बल दीजिए॥
वेद की बोलें सिखाएँ, सत्य को धारण करें।
हर्ष में हों मग्न सारे, शोक सागर से तरें॥
अध्यात्मिक रचाएँ, यज्ञ पर उपकार को।
धर्म-मर्यादा चलाकर, लाभ दें संसार को॥
नित्य श्रद्धा-भक्ति से, यज्ञादि हम करते रहें।
रोग पीड़ित विश्व के संताप सब हरते रहें॥
कामना मिट जाय मन से, पाप अत्याचार की।
भावनाएँ शुद्ध होंवें, यज्ञ से नर-नारी की॥
लाभकारी हो हवन, हर जीवधारी के लिए।
वायु-जल सर्वत्र हों, शुभ गंध को धारण किए॥
स्वार्थ भाव मिटे हमारा, प्रेम पथ विस्तार हो।
‘इदं न मम’ का सार्थक, प्रत्येक में व्यवहार हो॥
हाथ जोड़ झुकाय मस्तक, वंदना हम कर रहे।
नाथ करुणा रूप करुणा, आपकी सब पर रहे॥
यज्ञ रूप प्रभो हमारे, भाव उज्ज्वल कीजिए।
छोड़ देंवे छल कपट को, मानसिक बल दीजिए॥
प्रभो मानसिक बल दीजिए॥
प्रभो मानसिक बल दीजिए॥
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