शोध प्रारूप SYNOPSIS कैसे तैयार करें|| शोध प्रारूप कैसे तैयार करें? ||सिनॉप्सिस कैसे बनाएं ||
Автор: Kalanath Mishra
Загружено: 2021-06-06
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रीरीसर्च प्रपोज़ल कैसे लिखें ?,
पी-एच.डी. के लिए शोध प्रारूप कैसे तैयार करें?,
सिनॉप्सिस कैसे बनाएं ,
शोध प्रस्तावना कैसे लिखें ?
हिन्दी अनुसंधान,
how to write research proposal?,
प्रस्तुत व्याख्यान प्रो. कलानाथ मिश्र द्वारा हिन्दी के स्नातक, स्नातकोत्तर एवं विभिन्न प्रकार के शोधरथियों को ध्यान मे रखकर निर्मित किया गया है। यह व्याख्यान अनेक विद्वानों के मत के आधार पर तथा विभिन्न पुस्तकों से सामग्री एकत्र कर बनाया गया है । आशा है यह विडिओ आपको परितोष देने मे समर्थ होगा । इस विडिओ व्याख्यान के आधार पर अनुसंधानकर्ताओं को हिन्दी मे शोध प्रारूप तैयार करने मे मार्गदर्शन और सहायता मिलेगी। अतः इसके लिए सम्पूर्ण विडिओ दो -तीन बार देखें | अपना मन्तव्य भी अवश्य टिप्पणी के रूप मे दें |
इस बीच बहुत सारे शोधार्थीयों, लिटरचर के research scholar का मेरेपस फोन आया| किसी ने कहा सिर research methodology पर एक व्याख्यान दीजिए । किसी ने कहा कि सर (synopsis) बनाने का कुछ तरीका बताइए। सर मुझे research करना है। research proposal बनाने का कुछ टिप्स बताइए । पीएचडी के लिए सिनॉप्सिस तैयार कैसे करें ? मैंने सोचा कि अलग- अलग सब से बात करके समझाया तो नहीं जा सकता । ऊपर से कोरोना का समय है। मिलना संभव नहीं है। अतः मैंने शोध प्रारूप, (synopsis) बनाने के कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं, पद्धतियों को लेकर यह संक्षिप्त व्याख्यान तैयार किया है। विशेष रूप से जो हिन्दी के शोधार्थी हैं या किसी भी भाषा और साहित्य के शोधार्थी / रिसर्च scholar हैं उन सबको ध्यान मे रखकर यह व्याख्यान तैयार किया गया है । तो आइए सीखते हैं शोध अथवा अनुसंधान के लिए प्रारूप, रूप-रेखा तैयार करने का सटीक तरीका । तो आइए जानते हैं Ph.D synopsis कैसे लिखें ?
अंग्रेजी के रिसर्च शब्द के लिए हिंदी में अन्वेषण, गवेषणा, अनुसंधान, शोध आदि अनेक शब्द प्रचलित हैं । किंतु ‘अनुसंधान’ शब्द शोध की अपेक्षा अधिक व्यवहार में आता है।
यहाँ हम डॉ हरिश्चंद्र वर्मा द्वारा दिए गए एक सर्व समावेशी परिभाषा उद्धृत कर
“शोज्ञ निर्देशक के निर्देशन में शोध प्रविधि का सम्यक पालन करने वाले प्रतिभाशाली शोधार्थी द्वारा किसी निश्चित विषय पर किया गया वह दृष्टि संपन्न विश्लेषण विवेचन है, जिसमें तथ्य अनुसंधान के स्तर पर अज्ञात तथा अल्प ज्ञात तथ्यों का अन्वेषण एवं भ्रांत ज्ञात तथ्यों का संशोधन अभीष्ट है। सत्यान्वेषण के स्तर पर तथ्यों का वर्गीकरण एवं विश्लेषण के आधार पर निर्भ्रांत निष्कर्षों या सत्यों तक पहुंचने की वस्तुनिष्ठ एवं तर्क सम्मत साधना समाहित है।“
शोध के प्रमुख तत्व इस प्रकार है –
1. नवीन तथ्यों की खोज (discovery of new facts)
2. तथ्यों की नवीन ढंग से व्याख्या करना अभीष्ट है। (Fresh approach towards interpretation of facts)
3. शोध में तथ्यों का समीक्षात्मक परीक्षण और निर्णय क्षमता आवश्यक है। (Capability of critical examination and judgement of facts)
4. शोध-प्रबंध की प्रस्तुति के लिए विशिष्ट उपस्थापन शैली। (distinctive presentation of facts or findings)
कुछ महत्वपूर्ण बिन्दु इस संबंध मे जानना जरूरी है -
1. स्पष्ट और व्यवस्थित रूप रेखा निर्मित करने के लिए यह आवश्यक है कि चयनित विषय का स्वरूप स्पष्ट और असंदिग्ध हो।
2. कई बार ऐसा देखा जाता है कि शोधार्थी अनुभव के अभाव में ऐसे विषय का चयन कर लेते हैं जिनकी सीमा निर्धारित नहीं होती है। जिसके कारण अनावश्यक विस्तार शोध में हो जाता है।
3. अतः शोध विषय का क्षेत्र निश्चित और सीमित हो।
4. उस विषय -क्षेत्र का मंथन एक विषय केंद्रित दृष्टि से होना चाहिए।
यह सामग्री के प्रकार -
I. शोध क्षेत्र की मूल सामग्री।
II. मूल सामग्री से संबंधित सहयोगी ग्रंथ।
III. शोध से संबंद्ध समालोचना ग्रंथ।
IV. शोध से संबंध सैद्धांतिक अथवा शास्त्रीय ग्रंथ।
V. शोध से संबंधित अन्य सामग्री
1. प्रस्तावना भाग
प्रस्तावना शोध का प्रारम्भिक भाग है। प्रस्तावना लिखते समय इन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है ।
i. विषय चयन की प्रेरणा (कहाँ से मिली कैसे मिली ?)
ii. सामग्री संकलन । विषय से संबंधित कोण कोण सी सामग्री मिली ?
iii. विषय वस्तु का विवेचन एवं विषय का महत्व ।
iv. शोध की दृष्टि एवं दिशा ।
v. शोध कार्य की परिसीमा ।
vi. शोध प्रविधि ।
vii. विषय पर पूर्व मे किएगे कार्य का विवरण।
viii. शोध कार्य की प्रासंगिकता ।
ix. शोध प्रबंध की विशेषताएं ।
2. शोध विषय का मध्य भाग
I. विषय से संबंधित विभिन्न अध्यायों का निर्धारण।
II. चयनित अध्याय के अनुसार शीर्षक / उप-शीर्षक बनाना ।
III. तथ्य निरूपण।
IV. अध्याय के अनुकूल विषय का सम्यक विश्लेषण।
V. विभिन्न अध्यायों के बीच तरतम्यता/ एकसूत्रता ।
3. उपसंहार (निष्कर्ष)
i. शोध -सारांश (पूरे शोध प्रबंध का सार)
ii. सभी अध्यायों का सार ।
iii. शोध मे निहित केन्द्रीय तत्व ।
iv. संक्षिप्तता ।
4. परिशिष्ट
i. आधार ग्रंथ
ii. संदर्भ ग्रंथ
iii. आलोचनात्मक ग्रंथ
iv. पत्र-पत्रिकाएं (शोध पत्रिका)
v. रिपोर्ट, संस्मरण
vi. Gajetiyar गजेटियर
vii. साक्षात्कार (यदि हो)
viii. शब्दकोश तथा विश्वकोश
ix. इंटरनेट श्रोत
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