Panchmukhi Hanuman Kavach | पंचमुखी हनुमान कवच | Hanuman Kavach Mantra For Protection
Автор: Bhakti Unpluggged
Загружено: 2026-02-06
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Panchmukhi Hanuman Kavach | पंचमुखी हनुमान कवच | Hanuman Kavach Mantra For Protection
🙏 जय श्री राम | जय बजरंगबली | जय पंचमुखी हनुमान जी 🙏
यह पञ्चमुखी हनुमान कवच स्तोत्र एक अत्यंत शक्तिशाली वैदिक-तांत्रिक पाठ है, जिसे भय, नकारात्मक शक्तियों, शत्रु बाधा, दु:स्वप्न और ग्रहदोष से रक्षा के लिए पढ़ा जाता है। इसमें भगवान हनुमान के पाँच दिव्य स्वरूपों—कपि, नरसिंह, गरुड़, वराह और हयग्रीव—का स्मरण कर अष्ट दिशाओं से पूर्ण संरक्षण की कामना की गई है।
इस कवच का नियमित जाप करने से साधक को मानसिक बल, आत्मविश्वास, साहस और आध्यात्मिक सुरक्षा प्राप्त होती है। यह पाठ विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है जो भय, बाधा, शत्रु संकट, नकारात्मक ऊर्जा या अनिष्ट शक्तियों से पीड़ित हैं।
पञ्चमुखी हनुमान कवच का श्रद्धा और विश्वास के साथ पाठ करने से रामभक्ति की शक्ति जागृत होती है, जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और साधक पर भगवान हनुमान की कृपा सदैव बनी रहती है।
श्रवण या जाप के लिए उत्तम समय: प्रातःकाल, मंगलवार, शनिवार या संकटनाशन के समय।
🕉 पंचमुखी हनुमान जी के पाँच मुख:
पूर्वमुख (वानर मुख) – सभी प्रकार की सफलता व शक्ति प्रदान करते हैं।
दक्षिणमुख (नरसिंह मुख) – शत्रुओं का नाश व विजय देते हैं।
पश्चिममुख (गरुड़ मुख) – विष, नाग और रोगों से मुक्ति दिलाते हैं।
उत्तरमुख (वराह मुख) – धन, वैभव और समृद्धि प्रदान करते हैं।
ऊर्ध्वमुख (हयग्रीव मुख) – ज्ञान, बुद्धि और अध्यात्मिक उन्नति देते हैं।
पञ्चमुखी हनुमान कवच का महत्व
पञ्चमुखी हनुमान कवच को अत्यंत दुर्लभ, शक्तिशाली और रक्षात्मक स्तोत्र माना गया है। यह केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि साधक के चारों ओर एक अदृश्य दिव्य कवच का निर्माण करता है, जो हर प्रकार की नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है।
1. पंच दिशाओं से पूर्ण संरक्षण
इस कवच में भगवान हनुमान के पाँच स्वरूप—कपि, नरसिंह, गरुड़, वराह और हयग्रीव—का आवाहन है, जो साधक की दसों दिशाओं (अष्ट दिशा + ऊर्ध्व व अधो) से रक्षा करते हैं। यह इसे अन्य स्तोत्रों से विशेष बनाता है।
2. भय, शत्रु और नकारात्मक शक्तियों का नाश
पञ्चमुखी हनुमान कवच का नियमित पाठ
भय और असुरक्षा की भावना को समाप्त करता है
शत्रु बाधा, षड्यंत्र और ईर्ष्या से रक्षा करता है
भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र और दुष्ट ग्रह प्रभावों को शांत करता है
3. मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास की वृद्धि
यह कवच मन को स्थिर करता है, नकारात्मक विचारों को दूर करता है और साधक के भीतर साहस, धैर्य और आत्मबल को जागृत करता है।
4. संकट काल में विशेष प्रभावी
जब जीवन में अचानक समस्याएँ, भय, अपशकुन, दु:स्वप्न या लगातार बाधाएँ आने लगें, तब इस कवच का पाठ संकटनाशक औषधि के समान कार्य करता है।
5. रामभक्ति और आध्यात्मिक उन्नति
पञ्चमुखी हनुमान कवच केवल भौतिक रक्षा ही नहीं देता, बल्कि साधक को श्रीराम भक्ति, अनुशासन और धर्म मार्ग पर स्थिर करता हैl
6. इच्छापूर्ति और विजय का कवच
श्रद्धा और नियमपूर्वक जाप करने से साधक की सकारात्मक इच्छाएँ पूर्ण होती हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
पञ्चमुखी हनुमान कवच लाभ
• सभी दिशाओं से दिव्य रक्षा कवच
• भय, चिंता और नकारात्मक ऊर्जा का नाश
• शत्रु बाधा, तंत्र-मंत्र और बुरी दृष्टि से सुरक्षा
• मानसिक शक्ति, साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि
• संकट, दु:स्वप्न और ग्रहदोष में राहत
• कार्य-सफलता और विजय में सहायक
• रामभक्ति और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है
॥ जय बजरंगबली ॥
॥ जय श्री राम ॥
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Lyrics:-
ॐ श्री गणेशाय नमः
ॐ श्री हनुमते नमः।
ॐ पञ्चमुखि हनुमते नमः॥
पञ्चवक्त्रं महाभीमं त्रिनेत्रं च महाबलम्।
सिंहिकागर्भसंभूतं हनुमन्तं नमाम्यहम्॥
ॐ हं हनुमते रक्ष रक्ष सर्वतो माम्।
ॐ हं हनुमते रक्ष रक्ष सर्वतो माम्।
पूर्वे हनुमान् कपिमुखधारी रक्षतु माम्।
दक्षिणे नारसिंहवपुर्मां सदा पातु।
पश्चिमे गरुडरूपवान् रक्षतु।
उत्तरदिशि वराहरूपः सदा रक्षतु माम्।
ऊर्ध्वे हयग्रीवविग्रहः पातु मे शिरः।
अधस्तात् ब्रह्मास्त्ररूपः पातु पादयुग्मं सदा मम॥
अष्टदिशि रक्षतु पञ्चवक्त्रः स्वप्ने जाग्रति गच्छतः,
पश्यन्तं हसन्तं चलन्तं सर्वदा रक्षतु हनुमान् महाबलः॥
ॐ अञ्जनीसुताय महाबलाय रामदूताय नमः।
ॐ किलकिलाय वीराय विक्रान्ताय नमो नमः।
ॐ भूतप्रेतपिशाचादिनाशाय स्वाहा।
ॐ असिधाराकृशानुवत् कवचं मे हनुमान् स्थापयतु॥
रामभक्ताय रामदूताय हनुमते नमः।
सर्वशत्रुनिवारणाय कवचं पठेत्।
रक्षां कुरु महाबाहो त्राहि त्राहि नमोऽस्तुते॥
ॐ हं हनुमते नमः। ॐ हं हनुमते नमः।
ॐ ऊँ अञ्जनीगर्भसंभूतमारुतात्मजमुत्तमम्।
श्रीरामप्रियं भक्तं वन्दे लङ्काभयङ्करम्॥१॥
पञ्चमुखं धरं देवं हनुमन्तं नमाम्यहम्।
पूर्वं तु वानरं वक्त्रं कोटिसूर्यसमप्रभम्॥२॥
दक्षिणे नारसिंहं च भयनाशं सदा स्मरेत्।
पश्चिमे गरुडं वक्त्रं वक्रतुण्डं महाबलम्॥३॥
उत्तरं तु वराहं च कामरूपं महाबलम्।
ऊर्ध्वं हयग्रीवमुखं शङ्खचक्रगदाधरम्॥४॥
एवं पञ्चमुखं रूपं हनूमन्तं महाबलम्।
यो स्मरेत् प्रातरुत्थाय सर्वशत्रुभयं हरेत्॥५॥
नासयेत् दु:स्वप्नमशुभं दुष्टग्रहसमुद्भवम्।
अभिचाराणि सर्वाणि मन्त्रतन्त्राणि भूतले॥६॥
सापराद्धं न मुञ्चेत्तु पञ्चवक्त्रं हनूमतम्।
यं यं चिन्तयते कामं तं तं प्राप्नोत्यसंशयम्॥७॥
॥ श्रीराम जय राम जय जय राम ॥
॥ श्रीराम जय राम जय जय राम ॥
ॐ हं हनुमते रुद्रावताराय नमः॥
ॐ पञ्चमुखि हनुमते नमः॥
ॐ रक्ष रक्ष हनुमते नमः॥
ॐ हं हनुमते रुद्रावताराय नमः॥
ॐ पञ्चमुखि हनुमते नमः॥
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