प्रभु मेरे अपने हैं- सबकुछ प्रभु का है (4अ) - Swami Sharnanandji ka pravachan 4a
Автор: Swami Sharnanandji Maharaj
Загружено: 2018-12-07
Просмотров: 33871
Описание:
Swami Sri Sharananad Ji Maharaj's Discourse in Hindi.
स्वामी श्रीशरणानन्दजी महारामहाराज जी का प्रवचन।
मानव-जीवन पर विचार करने से ऐसा लगता है कि हमारा सम्बन्ध संसार से भी है और परमात्मा से भी है। शरीर की आवश्यकतायें संसारकी सहायता से पूरी होती हैं और अपने में चिन्मय-रसरूप जीवन की जो मांग है, उसकी पूर्ति परमात्मा से होती है। इस दृष्टि से मनुष्य को संसार और परमात्मा दोनों ही के प्रति साधनयुक्त दृष्टि रखनी चाहिए।
प्रस्तुत सन्तवाणी में यह बताया गया कि यदि साधक शरीर छोड़ दे संसार की मर्जी पर, अर्थात् संसार की सेवा करते हुए संसार से कुछ लेने का संकल्प न रखे तो शरीर की सारी आवश्यकताऐं समष्टि शक्ति के द्वारा पूरी हो जायेंगी। इसी प्रकार अपने को परमात्मा की जाति का मान कर उसी की शरणागति स्वीकार करके अपना सब संकल्प छोड़ कर अपने को परमात्मा की मर्जी के अधीन कर दे तो इससे चिन्मय-रस रूप जीवन मिल जायेगा।
Повторяем попытку...
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео
-
Информация по загрузке: