श्री भ्रामरी योगिनी स्तोत्र | चमत्कारी पाठ | हर संकट और बाधा नाशक
Автор: उद्दंड मार्तंड 𝑼𝒅𝒅𝒂𝒏𝒅 𝑴𝒂𝒓𝒕𝒂𝒏𝒅
Загружено: 2026-03-02
Просмотров: 73
Описание:
जय माता भ्रामरी 🙏
यह पावन श्री भ्रामरी योगिनी स्तोत्र श्रद्धा और भक्ति से रचित है। जो साधक इस स्तोत्र का नित्य पाठ या श्रवण करता है, उसके जीवन से भय, बाधा, शत्रु कष्ट और नकारात्मकता दूर होती है।
माँ भ्रामरी की दिव्य कृपा से मिलता है —
✨ सुख और शांति
✨ धन एवं समृद्धि
✨ आत्मबल और विजय
✨ भक्ति एवं आध्यात्मिक उन्नति
इस स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से नवरात्रि, अमावस्या, या प्रतिदिन प्रातः और सायं करना अत्यंत फलदायक माना गया है।
यदि आपको यह पाठ प्रिय लगे तो वीडियो को Like 👍 करें, Share करें और Channel को Subscribe अवश्य करें।
लेखरंजन द्वारा समर्पित भक्ति प्रस्तुति।
जय माँ भ्रामरी 🐝🔱
🔖
#श्रीभ्रामरीयोगिनी
#भ्रामरीस्तोत्र
#देवीस्तोत्र
#नवरात्रि_विशेष
#शक्तिपाठ
#दुर्गामंत्र
#भक्ति
#लेखरंजन
#Mantra
#DeviBhakti
#SpiritualVibes
__
॥ श्रीभ्रामरीयोगिनीस्तोत्रम् ॥
ध्यानम्
भ्रामरीं भृङ्गनिनादपूर्णवदनाम्
भास्वत्कोटिसूर्यप्रभाम्।
शोणाम्बरधारिणीं त्रिनयनां
शूलाक्षमालाधराम्॥
सिंहासीनां सुरवन्दितां जगदम्बां
चन्द्रार्धमौलिस्थिताम्।
ध्यायेत् लेखरञ्जननामो भक्तजनः
सर्वार्थसिद्धिप्रदाम्॥
विनियोगः
ॐ अस्य श्रीभ्रामरीयोगिनीस्तोत्रस्य
लेखरञ्जनकृतस्य स्तोत्रस्य।
श्रीभ्रामरीयोगिनीप्रीत्यर्थं,
सर्वदुःखनिवारणार्थं,
आत्मबलविजयप्राप्त्यर्थं च जपे विनियोगः॥
करन्यासः
ॐ भ्रामर्यै अङ्गुष्ठाभ्यां नमः।
ॐ भृङ्गनादिन्यै तर्जनीभ्यां नमः।
ॐ कालरात्र्यै मध्यमाभ्यां नमः।
ॐ महाशक्त्यै अनामिकाभ्यां नमः।
ॐ दुर्गायै कनिष्ठिकाभ्यां नमः।
ॐ सर्वमङ्गल्यै करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः॥
अङ्गन्यासः
ॐ भ्रामर्यै हृदयाय नमः।
ॐ भृङ्गध्वन्यै शिरसे स्वाहा।
ॐ जगद्धात्र्यै शिखायै वषट्।
ॐ सिंहवाहिन्यै कवचाय हुम्।
ॐ त्रिनेत्रायै नेत्रत्रयाय वौषट्।
ॐ पराशक्त्यै अस्त्राय फट्॥
स्तोत्रम्
जय भ्रामरि देवि त्रैलोक्यवन्दिते।
जय भृङ्गरवाकीर्णे दैत्यदर्पहरप्रिये॥
त्वमेव शक्तिः परमाऽदिशक्तिः
त्वमेव माता भुवनत्रयस्य।
त्वमेव काली कमला च दुर्गा
त्वमेव सर्वं मम देवि नित्यम्॥
भृङ्गनिनादेन दिगन्तपूरिणि
दुष्टासुराणां भयकारिणि त्वम्।
लेखरञ्जनकृतभक्तिवाक्यैः
तुष्यस्व नित्यं वरदे नमस्ते॥
रक्ताम्बरालङ्कृतसुन्दराङ्गि
रत्नप्रभाभास्वरदिव्यमूर्ते।
सिंहासनस्था सुरसिद्धवन्द्या
संसारसागरात् त्राहि मां त्वम्॥
मधुकैटभदर्पहा त्वमेव
महिषासुरमर्दिनि प्रसीद।
भ्रामररूपेण जगत्समस्ता
रक्षस्व मां भक्तवत्सले॥
शत्रून् विनाशय मनोविकारान्
दारिद्र्यदुःखं हर मेऽम्बिके त्वम्।
ज्ञानं च भक्तिṁ च परां प्रयच्छ
मोक्षप्रदायिनि नमोऽस्तु ते॥
फलश्रुतिः
इदं स्तोत्रं पठेद् भक्त्या
लेखरञ्जननामकः नरः।
भ्रामरीयोगिनी तस्य
सर्वाभीष्टं प्रयच्छति॥
सर्वरोगभयं नाशं
दारिद्र्यं च विनश्यति।
विद्यां यशः सुखं पुत्रान्
भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति॥
त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नित्यं
श्रद्धाभक्तिसमन्वितः।
तस्य जीवनमार्गे स्यात्
सदा देवीप्रसन्नता॥
__
🔱 श्री भ्रामरी योगिनी स्तोत्र – पाठ विधि 🔱
श्री भ्रामरी योगिनी के स्तोत्र का पाठ श्रद्धा, शुद्धता और एकाग्रता से करना अत्यंत फलदायक माना गया है। नीचे सरल एवं प्रभावशाली पाठ-विधि दी जा रही है —
1️⃣ पूर्व तैयारी
प्रातः ब्रह्ममुहूर्त या सायंकाल स्नान कर स्वच्छ पीले/लाल वस्त्र धारण करें।
पूजास्थल पर माता भ्रामरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
दीपक (घी का), धूप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें।
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन ग्रहण करें।
2️⃣ संकल्प
दाहिने हाथ में जल लेकर मन ही मन संकल्प करें —
“मैं (अपना नाम) श्रद्धा-भक्ति से श्री भ्रामरी योगिनी स्तोत्र का पाठ कर रहा/रही हूँ, माता मेरी मनोकामना पूर्ण करें।”
फिर जल पृथ्वी पर छोड़ दें।
3️⃣ ध्यान एवं विनियोग
पहले माता का ध्यान करें (ध्यान श्लोक का पाठ करें)।
विनियोग मंत्र बोलकर पाठ आरम्भ करें।
4️⃣ करन्यास एवं अङ्गन्यास (यदि जानते हों)
करन्यास और अंगन्यास करने से पाठ अधिक प्रभावी होता है।
यदि न कर सकें तो सीधे स्तोत्र पाठ भी कर सकते हैं।
5️⃣ मुख्य स्तोत्र पाठ
शांत और स्पष्ट उच्चारण से स्तोत्र का पाठ करें।
कम से कम 1 बार, विशेष फल हेतु 3, 11 या 21 बार पाठ करें।
नवरात्रि में प्रतिदिन पाठ अत्यंत शुभ माना गया है।
6️⃣ समापन
अंत में माता से क्षमा प्रार्थना करें।
“ॐ भ्रामर्यै नमः” मंत्र का 11 बार जप करें।
आरती कर प्रसाद वितरित करें।
🌺 विशेष लाभ
✔ शत्रु बाधा नाश
✔ भय एवं नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा
✔ धन-समृद्धि में वृद्धि
✔ आत्मबल और आध्यात्मिक उन्नति।
Повторяем попытку...
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео
-
Информация по загрузке: