स्थूल-सूक्ष्म-कारण शरीर तथा सुसुप्ति- स्वप्न-जाग्रत अवस्था मायामय है | Dandi Swami HansanandJi
Автор: Vedanta Mission
Загружено: 2020-11-08
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स्थूल-सूक्ष्म-कारण शरीर तथा सुसुप्ति- स्वप्न-जाग्रत अवस्था मायामय है
Paramhamsa Dandi Swami Hansanand Saraswati
Best Vedanta Discourses In Hindi By HansanandJi
दंडी स्वामी हंसानन्द सरस्वती
दंडी स्वामी हंसानंद जी
हिन्दी मे वेदान्त प्रवचन
Dandi Swami Hansanand Saraswati
Disciple Of Dharma Samrat Karpatriji
Vedanta Discourses In Hindi
आत्मबोध से आत्मतृप्ति एवं आत्ममुक्ति
" जिसने आत्मा को अपने ही स्वरुप से जान लिया है तो उसकी बस आत्मा मे ही प्रीति है ,आत्मा मे ही तृप्ति है, आत्मा मे ही संतुष्टि है | वह कृतकृत्य है |अब उसको कुछ करना शेष नही है |कुछ पाना शेष नही है | आत्मा को जान लेने से कुछ भी अप्राप्त नही रहता | आत्मा तो अमृतरुप है| आत्मा की मृत्यु तो होती ही नही | तो फिर मृत्यु को हटाने के लिए और अमृतत्व की प्राप्ति के लिए कौन सा कर्म करना है ? अमृतत्व तो नित्य प्राप्त ही है |कही दूर जाने की जरुरत नही | कोई जटिल साधन करने की जरुरत नही | वह तो तुम्हारा स्वरुप ही है | वह तो स्वयं स्वरुप से ज्ञानस्वरुप है | परम प्रकाशरुप है | तो ज्ञान प्राप्ति के लिए क्या करना है ? करना- धरना तो अज्ञानावस्था मे ही होता है | जब सब कुछ जान लिया , अपना स्वरुप बोध हुआ तो कोई भी कर्तव्य शेष् नही रहता | जीव परिपूर्ण, कृतकृत्य हुआ अपने आनन्द मे तृप्त हो जाता है ....... ...."
श्रीमत्परमहंस दंडी स्वामी हंसानन्द सरस्वती जी महाराज
श्रोत्रीय,ब्रह्मनिष्ठ,वेदान्तमूर्ति,संयासमूर्ति,त्यागमूर्ति,आनन्दमूर्ति,करुणामूर्ति, वर्तमान आध्यात्मिक क्षितिज के सर्वाधिक देदीप्यमान सूर्य, धर्म सम्राट करपात्री जी महाराज के अत्यन्त प्रिय शिष्य एवं साक्षात ब्रह्म स्वरुप मेरे गुरुदेव श्रीमत परमहंस दण्डी स्वामी हंसानंद सरस्वती जी महाराज विदेहमुक्ति के पश्चात परमधाम-परमपद पर आरूढ |
संक्षिप्त परिचय
पूज्य गुरुदेव श्री मत्परमहंस दंडी स्वामी हंसानन्द सरस्वती जी महाराज का जन्म 1912 मे उतर प्रदेश के फतेहपुर जिले के धारुपुर गाव मे एक ब्राह्मण परिवार मे हुआ था | उनकी प्रारम्भिक शिक्षा स्थानीय संस्कृत विद्यालय मे हुई | 12 वर्ष की अवस्था मे ही गुरुदेव को संसार एवं परिवार से वैराग्य हो गया और अचानक एक दिन घर त्याग कर बनारस चले गये | बनारस मे ही उन्होने वेद, वेदान्त,पुराण,स्मृति, रामायण तथा भारतीय दर्शन का गहन अध्ययन किया | 1962 मे धर्म सम्राट करपात्री जी महाराज ने उन्हे दंडी संयास की विधिवत दीक्षा दी और अपना शिष्य बनाया | करपात्री जी गुरुदेव की विद्वता एवं शास्त्रार्थ निपुणता से इतने प्रभावित थे कि गुरुदेव को शास्त्रार्थ सम्राट की उपाधि से विभूषित कर दिया | गुरुदेव को करपात्री जी ने ज्योतिष्पीठाधीश्वर आदिशंकराचार्य बनने का निमंत्रण दिया जिसे गुरुदेव ने विनम्रता पूर्वक अस्वीकार कर दिया | पूज्य गुरुदेव पिछले 50 वर्षो से ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम स्थित कुटिया न.2 मे प्रवास करते हुए वेदान्त पर लगातार मार्मिक प्रवचन करते रहे | 3 जून 2020 को 108 वर्षो की आयु मे गुरुदेव स्वर्गाश्रम स्थित अपनी कुटिया मे ब्रह्मलीन होकर परमधाम सिधार गये |
Paramhamsa Dandi Swami Hansanand Saraswati ji Maharaj lived in Kutiya No. 2 , Swargasram in Rishikesh , Uttarakhand from 1970- 2020 .Paramhamsa Dandi Swami Hansananda Saraswati , disciple of Dharma Samrat Karpatri ji Maharaj, was a Srotriya Brahmanisth Jivanmukta Sannyasi of Adi Shankara Order . He was widely regarded as a living Self Realized Master . He attained Mahasamadhi/Moksha and became Videhmukata on June 3 ,2020 at his Kutiya at Swargasram, Rishikesh at the age of 108.Swami Sacchidananda Saraswati became his disciple and was initiated into Paramhamsa Sannyasa on Sravani Poornima 18th August 2016 .
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Swami Sacchidananda Saraswati , disciple of Dandi Swami Hansanand Saraswati ji Maharaj, is a Paramhamsa Sannyasi, Self Realization Guru, Vedanta Philosopher, Advaita Master and Founder of Veda Vedanta Mission, New Delhi.
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