स्पेशल भजन: शरण तिहारी भोलेनाथ | Sharan Tihari Bholenath | Peaceful Shiv Bhajan | morning bhajan
Автор: laxman bhardwaj
Загружено: 2026-01-26
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Start your Monday morning with this peaceful Shiv Bhajan 'Sharan Tihari Bholenath
ना आदि जिसका और ना ही, जिसका कोई अंत है,
तीनों लोक में गूंजता, जिसका ही वृत्तांत है।
काल भी जिससे डरे, वो कालों का महाकाल है,
भक्तों का रक्षक वही, मेरा दीनदयाल है॥
स्थायी (Chorus)
(लय शुरू करें - Rhythmic)
हे शिव शंकर, हे भोलेनाथ,
रखना हम पर अपना हाथ।
हे शिव शंकर, हे भोलेनाथ,
रखना हम पर अपना हाथ।
तेरे चरणों में जो आया,
तूने उसको पार लगाया।
हम भी खड़े हैं तेरे द्वार,
सुन लो विनती बारम्बार...
हे शिव शंकर, हे भोलेनाथ,
रखना हम पर अपना हाथ॥
अंतरा १ (Verse 1)
(वर्णन - Description of Shiva)
जटा में तेरी गंगा विराजे, माथे चंदा सोहे,
तेरा ये सन्यासी रूप, मन को मेरे मोहे।
जटा में तेरी गंगा विराजे, माथे चंदा सोहे,
तेरा ये सन्यासी रूप, मन को मेरे मोहे।
तन पर भस्म रमाये बाबा,
नंदी पर तुम साजे बाबा।
डमरू बाजे डम-डम-डम,
मिट जाए जीवन के गम।
तुम ही हो सृष्टि के आधार...
हे शिव शंकर, हे भोलेनाथ,
रखना हम पर अपना हाथ॥
अंतरा २ (Verse 2)
(सरलता - Simplicity of Worship)
ना मांगो तुम सोना-चांदी, ना ही हीरे-मोती,
भाव के भूखे मेरे भोले, जगमग तेरी ज्योति।
ना मांगो तुम सोना-चांदी, ना ही हीरे-मोती,
भाव के भूखे मेरे भोले, जगमग तेरी ज्योति।
एक लोटा जल जो चढ़ाये,
मनवांचित फल वो पा जाए।
बेलपत्र अर्पण जो कर दे,
झोली खुशियों से तू भर दे।
करते पल में बेड़ा पार...
हे शिव शंकर, हे भोलेनाथ,
रखना हम पर अपना हाथ॥
अंतरा ३ (Verse 3)
(दयालुता - Compassion/Nilkanth)
देव और दानव जब भी उलझे, तुमने ही सुलझाया,
विष का प्याला पीकर तुमने, नीलकंठ कहलाया।
देव और दानव जब भी उलझे, तुमने ही सुलझाया,
विष का प्याला पीकर तुमने, नीलकंठ कहलाया।
दुख भंजन तुम सुख के दाता,
तुम ही पिता और तुम ही माता।
काम, क्रोध, मद, लोभ मिटा दो,
ज्ञान की सीधी राह दिखा दो।
कर दो थोड़ी दया की धार...
हे शिव शंकर, हे भोलेनाथ,
रखना हम पर अपना हाथ॥
विशेष जाप (Chanting Section)
(यहाँ गति थोड़ी बढ़ाएं - High Energy/Faster Tempo)
ॐ नमः शिवाय, हरि ॐ नमः शिवाय।
ॐ नमः शिवाय, हरि ॐ नमः शिवाय।
बोलो... शम्भू-शम्भू, शिव शम्भू-शम्भू।
मेरे... शम्भू-शम्भू, शिव शम्भू-शम्भू।
(दोहराएं - 4 से 8 बार)
कैलाश पति की... जय।
गौरी शंकर की... जय।
सोमनाथ की... जय।
अंतरा ४ (Verse 4)
(समर्पण - Final Surrender)
(वापस मध्यम गति में आएं)
भटक रहा था जग में अब तक, राह नहीं थी पाई,
तेरी शरण में आकर बाबा, मैंने आस लगाई।
भटक रहा था जग में अब तक, राह नहीं थी पाई,
तेरी शरण में आकर बाबा, मैंने आस लगाई।
मेरी भूल क्षमा सब कर दो,
भक्ति का वरदान हमें दो।
सांसें जब तक चले ये मेरी,
जिह्वा गाये महिमा तेरी।
बस इतना कर दो उपकार...
समापन (Outro)
हे शिव शंकर, हे भोलेनाथ,
रखना हम पर अपना हाथ।
तेरे चरणों में जो आया,
तूने उसको पार लगाया।
बोलो हर हर महादेव!
हर हर महादेव!
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