मेवाड़ राजवंश का रहस्यमय और वीर इतिहास PART -10
Автор: Rajasthan Success Point
Загружено: 2026-02-04
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राणा सांगा – सम्पूर्ण जानकारी (मेवाड़ राजवंश)
राणा सांगा का वास्तविक नाम महाराणा संग्राम सिंह था। वे मेवाड़ राजवंश के महान शासक और सिसोदिया वंश के प्रतापी राजा थे। उनका शासनकाल 1509 ई. से 1527 ई. तक रहा। राणा सांगा को भारतीय इतिहास के सबसे साहसी और पराक्रमी राजपूत शासकों में गिना जाता है।
जन्म एवं वंश
जन्म: लगभग 1482 ई.
पिता: राणा रायमल
वंश: सिसोदिया (गुहिल वंश)
राजधानी: चित्तौड़गढ़
राणा सांगा की वीरता
राणा सांगा ने अपने जीवन में लगभग 100 से अधिक युद्ध लड़े। वे कई युद्धों में घायल हुए:
एक आँख युद्ध में चली गई
एक हाथ भंग हो गया
शरीर पर अनेक गहरे घाव थे
इसी कारण उन्हें एक आँख से अंधा योद्धा कहा जाता है, फिर भी उनका साहस कभी कम नहीं हुआ।
प्रमुख युद्ध
खातोली का युद्ध (1517 ई.)
राणा सांगा बनाम इब्राहीम लोदी
राणा सांगा की विजय
धौलपुर का युद्ध (1518 ई.)
दिल्ली सल्तनत को भारी नुकसान
खानवा का युद्ध (1527 ई.)
राणा सांगा बनाम बाबर
यह युद्ध भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है
राजनीतिक उपलब्धियाँ
राणा सांगा ने राजपूतों को एकजुट किया
मेवाड़ का विस्तार राजस्थान, मालवा और गुजरात तक किया
वे अंतिम ऐसे भारतीय शासक माने जाते हैं जिन्होंने विदेशी आक्रमणकारियों को कड़ी चुनौती दी
मृत्यु
मृत्यु: 1527 ई.
कुछ इतिहासकारों के अनुसार उनकी मृत्यु विष देकर की गई थी।
ऐतिहासिक महत्व
राणा सांगा को राजपूत स्वाभिमान और शौर्य का प्रतीक माना जाता है
वे महाराणा प्रताप के पूर्वज थे
उनका जीवन त्याग, बलिदान और राष्ट्रप्रेम की मिसाल है#RanaSanga
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