गोगाजी का मन मोहित भजन | गोगा मेड़ी आये तेरा नाम रट के | Jaharveer Bhajan | Gogaji Ke Bhajan 2025
Автор: Gorakhnath Ki Mahima
Загружено: 2025-08-11
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गुरु गोरखनाथ या गोरक्षनाथ नाथ सम्प्रदाय के योगी एवं सन्त पुरुष थे। उन्होंने पूरे भारत का भ्रमण किया और अनेकों ग्रन्थों की रचना की। उनका मन्दिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर नगर में स्थित है।[3] गोरखनाथ के नाम पर इस जिले का नाम गोरखपुर पड़ा है। गोरखनाथ के शिष्य का नाम भैरोनाथ था जिनका उद्धार माता वैष्णोदेवी ने किया था। पुराणों अनुसार गोरखनाथ जी भगवान शिव के अवतार थे।
गोगाजी का मन मोहित भजन | गोगा मेड़ी आये तेरा नाम रट के | Jaharveer Bhajan | Gogaji Ke Bhajan 2025
गोगाजी का मन मोहित भजन | गोगा मेड़ी आये तेरा नाम रट के | Jaharveer Bhajan | Gogaji Ke Bhajan 2025
गोगाजी का मन मोहित भजन | गोगा मेड़ी आये तेरा नाम रट के | Jaharveer Bhajan | Gogaji Ke Bhajan 2025
गोगाजी का मन मोहित भजन | गोगा मेड़ी आये तेरा नाम रट के | Jaharveer Bhajan | Gogaji Ke Bhajan 2025
नेपाल के गोरखा लोगों का 'गोरखा' नाम गुरु गोरखनाथ जी के नाम से ही सम्बन्ध रखता है। नेपाल में एक जिला है गोरखा, उस जिले का नाम गोरखा भी इन्ही के नाम से पड़ा। माना जाता है कि गुरु गोरखनाथ सबसे पहले यहीं दिखे थे। गोरखा जिला में एक गुफा है जहाँ गोरखनाथ का पग चिन्ह है और उनकी एक मूर्ति भी है। यहाँ हर साल वैशाख पूर्णिमा को एक उत्सव मनाया जाता है जिसे 'रोट महोत्सव' कहते हैं और यहाँ मेला भी लगता है। गुरू गोरक्ष नाथ जी का एक स्थान उच्चे टीले गोगा मेड़ी, राजस्थान हनुमानगढ़ जिले में भी है।इनकी मढ़ी सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के नजदीक वेरावल में है। इनके साढ़े बारह पंथ होते हैं।
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