जॉइंट रिप्लेसमेंट: दोनों घुटने साथ या अलग? डॉ. अभिषेक कुमार दास | मेदांता, पटना
Автор: Medanta
Загружено: 2026-02-02
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घुटने के दर्द और घिसाव की समस्या में जॉइंट रिप्लेसमेंट एक प्रभावी समाधान है। डॉ. अभिषेक कुमार दास बताते हैं कि जब दोनों घुटनों में समस्या हो, तो मरीज अक्सर सोचते हैं कि रिप्लेसमेंट दोनों घुटनों का एक साथ करना चाहिए या अलग-अलग। सही निर्णय कई कारकों पर निर्भर करता है।
वे समझाते हैं कि दोनों घुटनों का एक साथ रिप्लेसमेंट तभी किया जाता है जब मरीज की सामान्य सेहत अच्छी हो और वह ऑपरेशन और रिकवरी दोनों को सहन कर सके। इसके फायदे यह हैं कि एक ही सर्जरी में दोनों घुटनों का इलाज हो जाता है और कुल हॉस्पिटल स्टे कम होता है। वहीं, कुछ मरीजों के लिए एक-एक करके रिप्लेसमेंट करना बेहतर होता है, खासकर जब उनकी उम्र, अन्य स्वास्थ्य स्थितियां या रिकवरी क्षमता सीमित हो।
डॉ. दास के अनुसार, सही फैसला लेने के लिए मरीज का पूर्ण स्वास्थ्य मूल्यांकन, दर्द का स्तर, जीवनशैली, गतिविधियों की जरूरत और सर्जरी के जोखिम पर ध्यान देना जरूरी है। विशेषज्ञ की सलाह और व्यक्तिगत मूल्यांकन के आधार पर ही यह तय किया जा सकता है कि एक साथ या अलग-अलग रिप्लेसमेंट उपयुक्त होगा।
डॉ. अभिषेक कुमार दास की प्रोफ़ाइल देखें –
एसोसिएट डायरेक्टर, आर्थोपेडिक्स, मेदांता, पटना
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