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मकर संक्रांति के दिन भूलकर भी न करें ये काम/ Importance Of Makar Sankranti, /what should be done

मकर संक्रांति के स्नान का ये है वैज्ञानिक रहस्य

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मकर संक्रत

Автор: Chamatkari भविष्य

Загружено: 2018-03-01

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Описание: मकर संक्रांति के दिन भूलकर भी न करें ये काम/ Importance Of Makar Sankranti, /what should be done
मकर संक्रांति के दिन भूलकर भी न करें ये काम || Don't do these things on makar sankranti

मकर संक्रांति, ग्रहण, अमावस्या और पूर्णिमा पर गंगा स्नान या अन्य पौराणिक तीर्थों में शास्त्रीय विधि से स्नान करने का बहुत महत्व है। भविष्यपुराण में महर्षि वेदव्यास का कथन है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा, सिंधु, सरस्वती, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, कावेरी, सरयू, चंबल, क्षिप्रा, गया, प्रयाग व पुष्कर तीर्थ में सपत्नीक विधिवत स्नान, तर्पण व दान करने वाले पुण्यात्मा व्यक्ति को ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है।

संक्रान्त्यां पक्षयोरन्ते ग्रहणे चन्द्रसूर्ययो:।
गंगास्नातो नर: कामाद् ब्रह्मण: सदनं व्रजेत्।।

इस कड़ी में आप जानेंगे मकर संक्रांति के दिन स्नान के फल, न स्नान करने से होने वाली हानियां और इस दिन के कुछ वैज्ञानिक रहस्य। और सबसे आखिर में मिलेगा एक चमत्कारी उपाय जो आज शाम को करने से आपके रोजगार में आने वाली तमाम बाधाएं दूर कर देगा।

ऐसे प्राप्त करें पुण्य
तीर्थ स्नान न कर पाने की स्थिति में अपने घर में रखे पवित्र तीर्थ जल से भी स्नान करने का विधान शास्त्रों ने किया है। सारे तीर्थों का स्मरण करके घर पर भी पुण्य स्नान किया जा सकता है, जो तीर्थ स्नान के समान ही पुण्यदायी है।

कई धार्मिक पुस्तकों में इसके प्रमाण हैं। भले ही शिशिर ऋतु चल रही हो लेकिन मकर संक्रांति को गर्म जल से स्नान करने से बचना चाहिए। जितना हो सके तो स्वच्छ और शीतल जल का ही इस्तेमाल करें।

स्नान न करने से हानियां
देवीपुराण में लिखा है कि जो व्यक्ति मकर संक्रांति के पवित्र दिन तीर्थ स्नान नहीं करता, वह रोगी और निर्धन ही बना रहता है। मकर संक्रांति के दिन देवताओं के निमित्त तीर्थ में जाकर द्रव्य-सामग्री और पितरों के लिए जो भी पदार्थ दान दिए जाते हैं, उसे देवता और पितर हर्षित होकर स्वीकार कर लेते हैं।

देवीपुराण में तो अकाल मृत्यु से बचने के लिए संक्रांति को दुर्गासप्तशती पाठ करने या करवाने का भी विधान बताया गया है। 14 और 15 जनवरी को सूर्योदय के बाद तीर्थ स्थलों पर जाकर या घर पर ही देवों को पवित्र जल से स्नान करना चाहिए। इसके बाद सारे दिन ही पुण्यकाल रहने और श्रेष्ठ समय होने के कारण कभी भी दान दिया जा सकता है। पूर्ण पुण्यलाभ के लिए पुण्यकाल में ही स्नान-दान आदि करने चाहिए। सूर्योदय से सूर्यास्त तक दान किए जा सकते हैं।

पतंग उड़ाने का वैज्ञानिक रहस्य
देश-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पतंगबाजी के लिए कुछ विशेष दिन हैं। मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने का एक फायदा भी है। चूंकि इसी दिन भगवान सूर्य की किरणों का तेज बढऩे लगता है।

और अब तक शीत सहन करते हुए मनुष्य धूप से अक्सर दूर ही रहता है। सूर्य की किरणें हमारे रक्त और हड्डियों के लिए विशेष लाभदायक होती हैं। इनके और भी कई लाभ हैं। ये शीत से पैदा होने वाले रोगों में फायदेमंद है।

पतंगबाजी के दौरान दिनभर सूर्य देव की किरणें शरीर से टकराती हैं। इससे शरीर स्वस्थ रहता है। हालांकि पतंगबाजी के दौरान सावधानी का ध्यान रखना चाहिए। दोपहर को अगर सूर्य की किरणों का तेज बढ़ जाए तो ज्यादा देर तक धूप में नहीं रहना चाहिए।

तिल और गुड़ खाने का रहस्य
इस दिन गुड़ और तिल का दान किया जाता है। घरों में तिल के पकवान बनाए जाते हैं। इसका आध्यात्मिक महत्व है और वैज्ञानिक रहस्य भी।

तिल और गुड़ गर्म तासीर के होते हैं। गर्मियों में इनका अधिक सेवन नहीं किया जाता लेकिन शीत में ये बहुत लाभदायक हैं। तिल नेत्र, हड्डियों, रक्त, केश आदि के रोग दूर कर इन्हें दुरुस्त करता है।

यह खांसी-जुकाम, बहुमूत्रता जैसे रोगों में भी बहुत लाभदायक है। शीत से होने वाले शक्ति के क्षय को रोक कर शरीर को पुष्ट करता है। गुड़ भी शरीर को गर्म रखता है। यह पाचन और रक्त के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है।

तीर्थ स्नान का वैज्ञानिक आधार
मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान और अन्य तीर्थ स्थलों में उपलब्ध जलस्रोतों के जल में स्नान करने का विशेष महत्व माना गया है। इसका एक वैज्ञानिक आधार भी है।

तीर्थों के जल में विशेष आध्यात्मिक शक्ति होती है। इसके अलावा गंगा जैसी पवित्र नदियों का पानी रासायनिक दृष्टि से भी बहुत लाभदायक माना गया है।

मकर संक्रांति पर इन तीर्थों में स्नान करने से त्वचा, उदर, नेत्र, केश व शरीर के अन्य रोगों से मुक्ति मिलती है और शरीर निर्मल हो जाता है। इस प्रकार मनुष्य का शरीर अगले मौसम में स्वस्थ रहने के लिए तैयार हो जाता है।

तीर्थ स्नान का संदेश
तीर्थों के पवित्र जल में स्नान करने से एक लाभ और मिलता है। कहा जाता है कि तीर्थ स्थल के पवित्र जल में अगर मनुष्य सच्चे मन से किसी गलती या पाप से मुक्ति के लिए भगवान से प्रार्थना करता है तो वे उसे क्षमा कर देते हैं।

भगवान के लिए कुछ भी असंभव नहीं, लेकिन इसमें मुख्य है व्यक्ति का संकल्प और गलती का अहसास। स्नान के बाद अपने इष्ट देव का पूजन करें। साथ ही इस दिन से यह संकल्प करें कि अतीत में हुई उन भूलों को नहीं दोहराऊंगा।

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