14,या,15को मकर संक्रांति के दिन बेसिक से सामग्री दान कैसे करें चींटी का भोग कैसे निकले पितरों के लिए
Автор: Ranju Vijay ki Prakash Bhakti 6M
Загружено: 2026-01-13
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पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी यानी आज रात करीब 9:35 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे, इसलिए संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी की प्रातःकाल में रहेगा.
मकर संक्रांति पर पितरों के लिए भोग निकालने के लिए तिल, गुड़ और उड़द दाल से बनी चीजें (जैसे खिचड़ी, लड्डू, पकौड़े) बनाएं, सूर्य देव और पितरों का ध्यान करते हुए "अमुक गोत्रः अस्मत्पिता/पितामह/प्रपितामह, अमुक शर्मा तिलोदकं जलं तस्मै स्वधा नमः" मंत्र के साथ तिल-जल अर्पित करें और कौए, गाय, चींटी व कुत्तों को भोजन कराएं, खासकर उड़द दाल की टिक्की या खिचड़ी दें, जिससे पितृ दोष शांत होता है और आशीर्वाद मिलता है।
भोग निकालने की विधि:
स्नान और संकल्प: सुबह स्नान कर साफ वस्त्र पहनें। सूर्य देव को जल चढ़ाते हुए पितरों के लिए भोग निकालने का संकल्प लें।
भोग की तैयारी:
मुख्य भोग: उड़द दाल की खिचड़ी, तिल के लड्डू, या उड़द दाल के दही-बड़े बनाएं।
पंचबली: भोजन को 5 भागों में बांटें (गाय, कुत्ता, कौआ, चींटी, देव/ब्राह्मण के लिए)।
सूर्य देव को तिल और जल अर्पित करें।
पितरों के लिए 'अमुक गोत्रः अस्मत्पिता/पितामह/प्रपितामह, अमुक शर्मा तिलोदकं जलं तस्मै स्वधा नमः' मंत्र बोलते हुए दक्षिण दिशा की ओर तीन अंजुली जल और तिल दें (यहां 'अमुक गोत्र' और 'अमुक शर्मा' की जगह अपने गोत्र और पूर्वज का नाम बोलें)।
गाय को चारा या तिल-गुड़ खिलाएं।
कौओं को तिल-गुड़ या खिचड़ी दें (इनको पितरों का प्रतीक माना जाता है)।
कुत्तों को उड़द दाल की टिक्की या भोजन दें।
चींटियों के लिए आटे के लोंदे और चीनी डालें।
ब्राह्मण को भोजन कराएं या दान करें (तिल, गुड़, अन्न)।
भोग लगाने के बाद, घर के सदस्य प्रसाद ग्रहण करें।
तिल-गुड़: यह पितरों को प्रसन्न करने और पितृ दोष शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
उड़द दाल: उड़द दाल से बनी चीजें पितरों को विशेष प्रिय होती हैं और सुख-समृद्धि देती हैं।
दान: तिल, गुड़, कंबल, वस्त्र और अन्न का दान करें।
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