रानी जयमती ने सवाईभोज को वचन में बांधा। श्री देव चरित्र कथा श्री अजय गुरुजी देव धाम सिंगावदा।
Автор: Shree Ajay Guru Ji
Загружено: 2026-02-12
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रानी जयमती ने सवाईभोज को वचन में बांधा। श्री देव चरित्र कथा श्री अजय गुरुजी देव धाम सिंगावदा।रानी जयमती ने सवाई भोज को वचन में कैसे बांधा? | श्री देवनारायण चरित्र कथा | श्री अजय गुरुजी
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श्री देवनारायण जी की पावन कथा में वर्णित है कि रानी जयमती अत्यंत धर्मनिष्ठ, दृढ़ संकल्प वाली और मर्यादा का पालन करने वाली थीं। जब समय की परिस्थितियों ने राज्य और कुल की मर्यादा पर संकट खड़ा किया, तब रानी जयमती ने अपनी बुद्धिमत्ता और दृढ़ निश्चय से सवाई भोज को एक महत्वपूर्ण वचन में बाँधा।
कथा के अनुसार, रानी जयमती ने सवाई भोज से धर्म, न्याय और कुल की रक्षा का प्रण दिलवाया। उन्होंने सवाई भोज को स्मरण कराया कि एक क्षत्रिय का प्रथम कर्तव्य सत्य, धर्म और प्रजा की रक्षा करना है। रानी के दृढ़ शब्दों और सत्य के आग्रह से प्रभावित होकर सवाई भोज ने वचन दिया कि वे धर्म और मर्यादा की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में अडिग रहेंगे।
इसी वचन के कारण आगे चलकर कई महत्वपूर्ण घटनाएँ घटित हुईं, जिनसे भगवान श्री देवनारायण जी के अवतरण और उनके दिव्य कार्यों की भूमिका तैयार हुई।
यह प्रसंग हमें सिखाता है कि एक नारी की बुद्धि, साहस और दृढ़ संकल्प इतिहास की दिशा बदल सकता है।
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