Kanak Mandi Jammu
Автор: Vijay's World
Загружено: 2024-04-27
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डोगरी लोक गीत "कनक मंडी दा तांगा चलेया" आज भी लोग गुनगुनाते हैं। आज की पीढ़ी शायद यकीन न करे कि यह सिर्फ गीत ही नहीं बल्कि हकीकत भी है। इस बाजार से तांगा ही नहीं बल्कि मिनीबसें भी गुजरा करती थीं।
जम्मू का सबसे पुराना बाजार जिसे कनक मंडी भी कहा जाता है, जम्मू कश्मीर की सबसे पुरानी अनाज मंडी रही है। जम्मू में वेयर हाउस बनने से पहले इसी बाजार से लोग होलसेल में अनाज आदि खरीदते थे और इस बाजार में जम्मू से ही नहीं राजौरी, पुंछ डोडा, किश्तवाड़, कश्मीर से भी व्यापारी खरीदारी के लिए आते थे।
कनक मंडी बाजार के इतिहास का इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि डोगरी लोक गीत "कनक मंडी दा तांगा चलेया" आज भी लोग गुनगुनाते हैं। आज की पीढ़ी शायद यकीन न करे कि यह सिर्फ गीत ही नहीं बल्कि हकीकत भी है। इस बाजार से तांगा ही नहीं बल्कि मिनीबसें भी गुजरा करती थीं। बाजार में तब भी वही दुकानें थी जो आज हैं। इस बाजार में व्यापार तब भी ऐसा ही चलता था, जैसा आज। पिछले पांच दशकों से न तो वहां दुकानों की संख्या बढ़ी और न ही सड़क कम हुई लेकिन फिर भी बाजार जरूर छोटा हो गया है।
कारण है, इस बाजार की सड़कों पर दुकानदारों का अतिक्रमण। कनक मंडी से आज अगर आप पैदल भी गुजर रहें हैं तो यकीन मानिए आपको सीधा चलने की जगह नहीं मिलेंगी। अगर आप फुटपाथ पर चलने का प्रयास करेंगे तो वहां दुकानों का सामान पड़ा मिलेगा और अगर आप सड़क पर चलेंगे तो वहां दुकानदारों की ही गाड़ियां व आटो खड़ें मिलेंगे। अगर बीच में कहीं सड़क दिखी भी तो वहां से गुजर रहे वाहन आपको चलने नहीं देंगे। इस बाजार में अनाज के अलावा कपड़ों की भी होलसेल की दुकानें हैं।
शादी विवाह के सीजन में लोग दहेज आदि में देने के लिए कपड़े खरीदने भी इस बाजार में आते हैं। इसके अलावा रिटेल की दुकानें चलाने वाले दुकानदार भी यहां से आज भी खरीदारी करते हैं। हालांकि इस बाजार में दुकानें चलाने वाले कई पुराने दुकानदारों की वेयर हाउस भी दुकानें चल रही हैं लेकिन उनका कहना है कि इस बाजार में चलने वाली दुकानें आज भी पहले की ही तरह चल रही हैं।
इस बाजार में दुकानें चलाने वाले दुकानदारों का कहना है कि बाजार तो अब भी वैसे चल रहा है, जैसे पहले चला करता था। पहले बाजार में इतनी भीड़ नहीं रहती थी, जितनी अब है। लोग कम होते थे, इसलिए बाजार खुला दिखता है। अब आबादी बढ़ चुकी है। लोगों का आना जाना भी ज्यादा हो चुका है। पहले अगर व्यापारी या ग्राहक खरीदारी करने के लिए आते थे, तो वे पैदल आते थे लेकिन अब वे भी गाड़ियों को लेकर ही आते हैं। ऐसे में सड़कों पर जाम लगा रहता है। वहीं फुटपाथ पर अतिक्रमण बारे दुकानदारों का कहना है कि वे अपनी दुकानों का सामान अंदर ही रखते हैं। बाहर अगर कुछ सामान पड़ा भी मिलता है तो वह ग्राहकों का होता है जिसे पैक कर रख दिया जाता है। ग्राहक कुछ देर बाद उस सामान को लोड कैरियर में डालकर ले जाते हैं। होलसेल की मार्केट में ऐसा तो चलता ही है।
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