श्री महालक्ष्मी स्तोत्रम, कनकधारा स्तोत्र, श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम्
Автор: kirtan Daily
Загружено: 2026-02-05
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अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम् देवी लक्ष्मी के आठ दिव्य रूपों (आदि, धान्य, धैर्य, गज, संतान, विजय, विद्या, धन) को समर्पित एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जो धन, समृद्धि, बुद्धि और सुख प्रदान करता है। यह स्तोत्र हर रूप की स्तुति कर मधुसूदन (विष्णु) के साथ माँ लक्ष्मी से सदा रक्षा करने की प्रार्थना करता है।
श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम् (संस्कृत/हिंदी)
1. आदिलक्ष्मी (आदि लक्ष्मी)
सुमनिष्ट्रि-वर्लिनि मोक्षप्रदायनि मञ्जुल भाषिणि वेदनुते।
पङ्कजवासिनि देवसुपूजित सद्गुण वर्षिनि शान्तियुते।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि आदिलक्ष्मि सदा पालय माम्॥
2. धान्यलक्ष्मी (धान्य लक्ष्मी)
अयि कलिकल्मषनाशिनि कामिनि वैदिकरूपिणि वेदमये।
क्षीरसमुद्भव मङ्गल रूपिणि मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते।
मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि देवगणाश्रित पादयुते।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि धान्यलक्ष्मि सदा पालय माम्॥
3. धैर्यलक्ष्मी (धैर्य लक्ष्मी)
जय वरवर्णिनि वैष्णवि भार्गवि मन्त्रस्वरूपिणि मन्त्रमये।
सुरगणपूजित शीघ्रफलप्रद ज्ञानविकासिनि शास्त्रनुते।
भवभयहारिणि पापविमोचनि साधुजनाश्रित पादयुते।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि धैर्यलक्ष्मि सदा पालय माम्॥
आर्थिक समृद्धि: दरिद्रता का नाश और धन-वैभव की प्राप्ति।सकारात्मक ऊर्जा: घर में नकारात्मकता दूर होकर मानसिक शांति मिलती है।सफलता: कार्यक्षेत्र में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
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