इतिहास भी रो पड़ा! आपातकाल पर एक लड़की का भाषण | युवा संसद | तृतीय स्थान
Автор: Being Deepanshi
Загружено: 2026-01-06
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आज मैं यहाँ केवल एक वक्ता बनकर नहीं,
बल्कि उस पीढ़ी की आवाज़ बनकर खड़ी हूँ,
जो इतिहास से डरती नहीं—उससे सीखती है।
आज का मेरा विषय है — आपातकाल और उससे मिले सबक।
साथियों,
आपातकाल सिर्फ एक तारीख नहीं थी,
वह लोकतंत्र की सबसे कठिन परीक्षा थी।
वह दौर जब संविधान मौन था,
अभिव्यक्ति की आज़ादी कैद थी
और जनता की आवाज़ को दबा दिया गया था।
लेकिन सवाल यह है—
👉 क्या लोकतंत्र इतना कमज़ोर है?
👉 क्या जनता की शक्ति को हमेशा दबाया जा सकता है?
Повторяем попытку...
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