‘Ayi-Giri’-‘1-21’-FULL-FLOW- CHANT-JAY N Bhakti🙏
Автор: JAY N Bhakti
Загружено: 2025-11-01
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‘AYI GIRI-NANDINI STHOTRAM’🙏
‘अयि गिरि-नंदिनि स्तोत्रम्’🙏
‘அயி கி³ரி நந்தி³னி ஸ்தோத்ரம்’🙏
VERSES : ‘1 - 21’
‘FULL-FLOW CHANT’
BY
JAY N Bhakti
SHARANAM
🙏🙏🙏
1.अयि/गिरि-नंदिनि/नंदित-मेदिनि/ विश्व-विनोदिनि/नंद-नुते/.गिरि-वर-विंध्य-शिरोधि-निवासिनि/विष्णु-विलासिनि/जिष्णु-नुते ।भगवति हे/शिति-कंठ-कुटुंबिनि/ भूरि-कुटुंबिनि/भूरि-कृते/.जय-जय हे ! महिषा-सुर-मर्दिनि/ o रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥1॥
2.सुर-वर-वर्षिणि/दुर्धर-धर्षिणि/ दुर्मुख-मर्षिणि/हर्ष-रते/.त्रिभुवन-पोषिणि/शंकर-तोषिणि/ किल्बिष-मोषिणि/घोष-रते ।
दनुज-निरोषिणि/दिति-सुत-रोषिणि/दुर्मद-शोषिणि/सिंधु-सुते/.जय-जय हे ! महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥2॥
3.अयि/जगदंब/मदंब/कदंब/-वन-प्रिय-वासिनि/हास-रते/.शिखरि शिरो-मणि/तुंग-हिमालय/ शृंग-निजालय/मध्य-गते ।मधु-मधुरे/मधु-कैटभ-गंजिनि/ कैटभ-भंजिनि/रास-रते/.जय-जय हे ! महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥3॥
4अयि/शत-खंड/विखंडित-रुंड/ वितुंडित-शुंड/गजाधि-पते/.रिपु-गज-गण्ड/विदारण-चण्ड/ पराक्रम-शुण्ड/मृगाधि-पते ।निज-भुज-दण्ड/निपातित-खण्ड/ विपातित-मुण्ड/भटाधि-पते/.[-चंड]जय-जय हे ! महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥4॥
5.अयि/रण-दुर्मद/शत्रु-वधो-दित/ दुर्धर-निर्जर/शक्ति-भृते/.चतुर-विचार/धुरीण-महा-शिव/दूत-कृत/प्रमथा-धिपते ।दुरित-दुरीह/दुरा-शय-दुर्मति/दानव-दूत/कृतांत-मते/.जय-जय हे ! महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥5॥
6.अयि शरणा-गत/वैरि-वधू-वर/ वीर-वरा-भय-दाय-करे/.त्रिभुवन मस्तक/शूल-विरोधि/ शिरोधि-कृता-मल/शूल-करे ।दुमि-दुमि-तामर/दुंदुभि-नाद/महो- मुखरी-कृत/दिड्.ग्म-करे/.जय-जय हे/महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥6॥
7.अयि निज-हुड्.-कृति/मात्र-निरा-कृत/धूम्र-विलोचन/धूम्र-शते/.समर-विशो-षित/शोणित-बीज/ समुद्-भव-शोणित/बीज-लते ।.शिव-शिव-शुंभ/निशुंभ/महा-हव/ तर्पित-भूत-पिशा-चरते/.जय जय हे ! महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥7॥
8.धनु-रनु-सड्.ग/रण-क्षण-सड्.ग/ परि-स्फुर-दड्.ग/-नटत्-कटके/.कनक पिशड्.ग/-पृषत्-कनि-षड्.ग/रसद्-भट-श्रृड्.ग/हता-वटुके ।.कृत-चतु-रड्.ग/बल-क्षिति-रड्.ग/ घटद्-बहु-रड्.ग/रटद्-बटुके/.जय जय हे !महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥8॥
9.सुर-ललना/तत-थेयि-तथेयि/ कृताभि-नयो-दर/नृत्य-रते/.कृत-कुकुथः-कुकुथो/गड-दादिक-ताल/कुतू-हल/गान-रते ।धुधु-कुट/-धुक्कुट/धिं-धिमित-ध्वनि/धीर-मृदंग/निनाद-रते/जय जय हे ! महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥9॥
10.जय-जय/जप्य-जये-जय/ शब्द-पर-स्तुति/तत्पर विश्व-नुते/.भण-भण-भिंजिमि/भिड्.-कृत-नूपुर/शिंजित-मोहित/भूत-पते ।. नटित-नटार्ध/नटी-नट-नायक/ नाटित-नाट्य/सु-गान-रते/.जय जय हे ! महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥10॥
11.अयि-1.सु-मनः/-2.सु-मनः/-
3.सु-मनः/-4.सु-मनः/5.सु-मनो-हर/कांति-युते/.श्रित-1.रजनी/-2.रजनी/-3.रजनी/-4.रजनी/5.रजनी-कर/वक्त्र-वृते ।.सु-नयन/वि-1.भ्रमर-2.भ्रमर-
3.भ्रमर-4.भ्रमर-5.भ्रम-राधि-पते/.-जय जय हे ! महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥11॥
12.सहित/-महा-हव/मल्लम-तल्लिक/मल्लि-तरल्लक/मल्ल-रते/.विर-चित-वल्लिक/पल्लिक-मल्लिक/झिल्लिक-भिल्लिक/वर्ग-वृते ।.शित-कृत-फुल्ल/-समुल्ल-सिता-रुण/तल्लज-पल्लव/सल्-ललिते/.
जय जय हे ! महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥12॥
13.अवि-रल-गण्ड-/गलन्-मद-मेदुर/मत्त-मतं-गज/-राज-पते/.त्रि-भुवन-भूषण/-भूत-कला-निधि/ रूप-पयो-निधि/राज-सुते ।.अयि-सुदती-जन/लालस-मानस/ मोहन-मन्मथ/राज-सुते/.
जय जय हे ! महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥13॥
14.कमल-दला-मल/कोमल-कांति/कला-कलिता-मल/भाल-लते/.सकल-विलास/कला-निलय-क्रम/केलि-चलत्-कल/-हंस-कुले ।अलि-कुल/संकुल/कुव-लय/मण्डल/मौलि-मिलद्-भकु/-लालि-कुले/.
जय जय हे ! महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥14॥
15.कर-मुरली-रव-वीजित/कूजित/ लज्जित-कोकिल/मंजु-मते/.मिलित-पुलिंद/मनोहर-गुंजित/ रंजित-शैल/निकुंज-गते ।.निज-गुण-भूत/महा-शबरी-गण/ सद्गुण-संभृत/केलि-तले/.
जय जय हे ! महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥15॥
16.कटि-तट-पीत/दुकूल-विचित्र/ मयूख-तिरस्कृत/चंद्र-रुचे/.प्रणत-सुरा-सुर/मौलि-मणि-स्फुर/ दंशुल-सन्नख/चंद्र-रुचे ।.जित-कनका-चल/मौलि-पदोर्जित/ निर्भर-कुंजर/कुंभ-कुचे/.जय जय हे ! महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥16॥
17.विजित/1.सहस्र-करैक/2.सहस्र-करैक/3.सहस्र-करैक-नुते/.कृत सुर-तारक/1.संगर-तारक/2.संगर-तारक/सूनु-सुते ।.सुरथ-समाधि/समान-समाधि/ समाधि-समाधि/सुजात-रते
जय जय हे ! महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥17॥
18.पद-कमलं/करुणा-निलये/ वरि-वस्यति/यो-ऽनु-दिनं/सु-शिवे/.अयि-कमले/कमला-निलये/ कमला-निलयः/स कथं न भवेत् ।.तव पदम्-एव/परं-पदम्/-इत्यनु-शील-यतो/मम किं न शिवे/.
जय जय हे ! महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥18॥
19.कनक-लसत्कल/सिंधु-जलै-रनु/शिंचति-ते-गुण/रंग-भुवं/.भजति स किं न/शची-कुच-कुंभ/ तटी-परि-रंभ/सुखानु-भवम् ।.तव चरणं-शरणं/कर-वाणि/नता-मर-वाणि/निवासि शिवं/.
जय जय हे ! महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥19॥
20.तव विमलेंदु-कुलं/वदनेंदु-मलं/ सकलं ननु कूल-यते/.किमु पुरु-हूत/पुरींदु-मुखी सुमुखीभि-रसौ/विमुखी-क्रियते ।.मम तु मतं/शिव-नाम-धने/भवती कृपया/किमुत-क्रियते/.
जय जय हे ! महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥20॥
21.अयि-मयि/दीन-दयालु-तया/ कृप-यैव/त्वया भवितव्यम्-उमे/.अयि-जगतो-ऽजननी/कृपयासि यथासि/तथा-ऽनु-मितासि-रते ।.यद्-उचितम्-ऽत्र/भवत्युररी/-कुरुता-दुरु-तापम्/-ऽपा-कुरु ते/.जय जय हे ! महिषा-सुर-मर्दिनि/ रम्यक-पर्दिनि/शैल-सुते ॥21॥
इति श्री महिषा-सुर-मर्दिनि स्तोत्रम् ॥
MAY SHAKTHI MA BLESS US ALL!
🕉️🕉️
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