“कर्म करो, फल की इच्छा मत रखो” – गीता का दिव्य संदेश | Swami Shri Purushottamacharya Ji Maharaj
Автор: Shri Sharan
Загружено: 2026-02-11
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कर्म क्या है? 🤔
क्या हर काम जो हम करते हैं वही कर्म है?
भगवद गीता के अनुसार कर्म का वास्तविक अर्थ क्या है और कर्म कितने प्रकार के होते हैं?
इस दिव्य प्रवचन में विस्तार से समझाया गया है कि मन और बुद्धि के द्वारा किया गया प्रत्येक कार्य कर्म कहलाता है, और उसे तीन भागों में बांटा गया है —
🔹 तमोगुण कर्म (पाप / अशुभ कर्म)
🔹 रजोगुण कर्म (पाप और पुण्य मिश्रित)
🔹 सतोगुण कर्म (केवल शुभ कर्म)
साथ ही इस वीडियो में बताया गया है:
✨ कर्म के पीछे हमारा लक्ष्य क्या होना चाहिए?
✨ क्या अपने सुख के लिए किया गया कार्य भी कर्म है?
✨ श्रीकृष्ण ने गीता में निष्काम कर्मयोग के बारे में क्या कहा?
✨ सच्चा कर्म क्या है और उसका फल किसे मिलता है?
भगवान श्रीकृष्ण का अर्जुन को दिया गया उपदेश —
“कर्म करो, फल की इच्छा मत रखो” —
आज भी हमारे जीवन का मार्गदर्शन करता है।
अगर आप जीवन में शांति, सफलता और आध्यात्मिक उन्नति चाहते हैं तो यह वीडियो अंत तक अवश्य देखें।
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