BESTs of Ahmed Faraz|| Part-1
Автор: Deependra Singh
Загружено: 2026-02-08
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1- रफ़ाक़तों में पशेमानियाँ तो होती हैं
कि दोस्तों से भी नादानियाँ तो होती हैं
बस इस सबब से कि तुझ पर बहुत भरोसा था
गिले न हों भी तो हैरानियाँ तो होती हैं
उदासियों का सबब क्या कहें ब-जुज़ इस के
ये ज़िंदगी है परेशानियाँ तो होती हैं
'फ़राज़' भूल चुका है तेरे फ़िराक़ के दुख
कि शा'इरों में तन-आसानियाँ तो होती हैं
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2- ज़रा सी गर्द-ए-हवस दिल पे लाज़मी है 'फ़राज़'
वो इश्क़ क्या है जो दामन को पाक चाहता है
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3- यही दिल था कि तरसता था मरासिम के लिए
अब यही तर्क-ए-तअल्लुक़ के बहाने माँगे
अपना ये हाल कि जी हार चुके लुट भी चुके
और मोहब्बत वही अंदाज़ पुराने माँगे
दिल किसी हाल पे क़ाने ही नहीं जान-ए-'फ़राज़'
मिल गए तुम भी तो क्या और न जाने माँगे
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4- तुझे है मश्क़-ए-सितम का मलाल वैसे ही
हमारी जान थी जाँ पर वबाल वैसे ही
चला था ज़िक्र ज़माने की बेवफ़ाई का
सो आ गया है तुम्हारा ख़याल वैसे ही
मुझे भी शौक़ न था दास्ताँ सुनाने का
'फ़राज़' उस ने भी पूछा था हाल वैसे ही
Повторяем попытку...
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