“कुलदेवी की कृपा कैसे मिले? नवरात्रि में करें ये गुप्त उपाय!”
Автор: S.kumarAtre
Загружено: 2026-03-17
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👉 “सिर्फ 9 दिन में बदल जाएगी किस्मत – कुलदेवी की गुप्त साधना!” 🔥
🪷|| श्री कुलदेवी स्तोत्रम् || 🪷
श्लोक 1
नमस्ते श्रीकुलदेवी कुलाराध्या कुलेश्वरी।
कुलसंरक्षणी माता कौलिक ज्ञान प्रकाशिनी॥
अर्थ: हे कुलदेवी, आपको नमस्कार है। आप कुल की आराधना करने योग्य हैं, कुल की स्वामिनी हैं। आप कुल की रक्षा करने वाली माता हैं और कौलिक ज्ञान का प्रकाश करने वाली हैं।
श्लोक 2
वन्दे श्री कुल पूज्या त्वाम् कुलाम्बा कुलरक्षिणी।
वेदमाता जगन्माता लोक माता हितैषिणी॥
अर्थ: हे कुल की पूजनीया, कुलांबा, कुल की रक्षा करने वाली माता, आपको वंदन है। आप वेदों की माता हैं, जगत की माता हैं, लोक की माता हैं और सबका हित करने वाली हैं।
श्लोक 3
आदि शक्ति समुद्भूता त्वया ही कुल स्वामिनी।
विश्ववंद्यां महाघोरां त्राहिमां शरणागतम्॥
अर्थ: आप आदि शक्ति से प्रकट हुई हैं और कुल की स्वामिनी हैं। विश्व द्वारा वंदित और महाघोरा देवी, मैं आपकी शरण में हूं, मेरी रक्षा करें।
श्लोक 4
त्रैलोक्य ह्रदयं शोभे देवी त्वं परमेश्वरी।
भक्तानुग्रह कारिणी कुलदेवी नमोस्तुते॥
अर्थ: आप तीनों लोकों के हृदय में शोभित हैं और परमेश्वरी हैं। भक्तों पर अनुग्रह करने वाली कुलदेवी, आपको नमस्कार है।
श्लोक 5
महादेव प्रियंकरी बालानां हितकारिणी।
कुलवृद्धि करी माता त्राहिमां शरणागतम्॥
अर्थ: आप महादेव की प्रिय हैं और बालकों का हित करने वाली हैं। कुल की वृद्धि करने वाली माता, मैं आपकी शरण में हूं, मेरी रक्षा करें।
श्लोक 6
चिदग्निमण्डल संभुता राज्य वैभव कारिणी।
प्रकटितां सुरेशानी वन्दे त्वां कुल गौरवम्॥
अर्थ: आप चिदग्नि मंडल से प्रकट हुई हैं और राज्य का वैभव बढ़ाने वाली हैं। प्रकट हुई सुरेशानी, कुल के गौरव स्वरूपा आपको वंदन है।
श्लोक 7
त्वदीये कुले जातः त्वामेव शरणं गतः।
त्वत वत्सलोऽहं आद्ये त्वं रक्ष रक्षाधुना॥
अर्थ: आपके कुल में जन्मा हूं और आपकी ही शरण में गया हूं। आप मुझ पर वात्सल्य रखती हैं, हे आद्ये, अब मेरी रक्षा करें, रक्षा करें।
श्लोक 8
पुत्रं देहि धनं देहि साम्राज्यं प्रदेहि मे।
सर्वदास्माकं कुले भूयात् मंगलानुशासनम्॥
अर्थ: मुझे पुत्र दें, धन दें और साम्राज्य प्रदान करें। हमारे कुल में सदा मंगल का शासन बना रहे।
श्लोक 9
कुलाष्टकमिदं पुण्यं नित्यं यः सुकृती पठेत्।
तस्य वृद्धि कुले जातः प्रसन्ना कुलेश्वरी॥
अर्थ: यह कुलाष्टक पुण्यदायी है, जो भी नित्य इसका पाठ करता है, उसके कुल में वृद्धि होती है और कुलेश्वरी प्रसन्न होती हैं।
श्लोक 10
कुलदेवी स्तोत्रमिदं सुपुण्यं ललितं तथा।
अर्पयामि भवत भक्त्या त्राहिमां शिव गेहिनी॥
अर्थ: यह कुलदेवी स्तोत्र अत्यंत पुण्यदायी और सुंदर है। भक्तिपूर्वक आपको अर्पित करता हूं, हे शिव की घरवाली, मेरी रक्षा करें।
॥ श्री कुलदेव्यार्पणमस्तु ॥
॥ श्री कुलदेव्यार्पणमस्तु ॥
॥ श्री कुलदेव्यार्पणमस्तु ॥
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