तन मन धन अर्पित आप पर, हे सद्गुरु भव भय हारे ॥
Автор: Learn Advaita Vedanta
Загружено: 2026-03-11
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तन मन धन अर्पित आप पर, हे सद्गुरु भव भय हारे ॥ #gurubhakti #gurubhajan
यह गीत पूर्ण समर्पण और गुरु-भक्ति की दिव्य भावना को व्यक्त करता है। इसमें साधक अपने तन, मन और जीवन को गुरुचरणों में अर्पित करता है। हर श्वास में गुरु-स्मरण और हर कर्म में समर्पण का भाव प्रवाहित होता है। गीत अहंकार के विलय और आत्मबोध की अनुभूति को दर्शाता है। भक्ति यहाँ किसी विधि से नहीं, बल्कि सहज प्रेम से जन्म लेती है। शिष्य गुरु को ही साधन, साध्य और परम सत्य मानता है। पूरा गीत अंततः एक गहन आंतरिक शांति और अद्वैत अनुभव की ओर ले जाता है।
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