आज ये क्या हुआ कुंजेटा में सोचा नहीं था मौरी मेला 🙏
Автор: KANA NEGI VLOGS
Загружено: 2025-12-16
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नमस्कार साथियो 🙏, आज हम बात करेंगे गढ़वाल की धरती पर लगने वाले अद्भुत धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव — मोरी यानी मौरी मेले की।
ये मेला उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल ज़िले के तमलग गाँव और पास के कुण्डी गाँव में हर 12 साल में एक बार आयोजित किया जाता है।
लोक मान्यता है कि महाभारत के पांडवों ने अपने अज्ञातवास के समय यहाँ निवास किया था। कहते हैं कि माता कुंती ने तमलग गाँव को अपना ससुराल और कुण्डी गाँव को अपना मायका माना। इसी स्मृति को संजोने के लिए यह भव्य मेला आज भी जीवित है।
मेले की सबसे बड़ी और अनोखी परंपरा है – सुमेरपुर के जंगल से दो विशाल देवदार के पेड़ उखाड़ना। इन पेड़ों को ‘सिंम के पेड़’ भी कहा जाता है।
👉 एक पेड़ को लाकर तमलग के भैरवनाथ मंदिर में प्रतिष्ठित किया जाता है और दूसरा पेड़ कुण्डी के नागराज मंदिर में ले जाया जाता है।
पूरा क्षेत्र इस दौरान ढोल-दमाऊ की थाप पर गूंज उठता है। पांडव नृत्य, लोकगीत, झंडों और डांडियों के साथ निकलने वाली शोभायात्रा—सब मिलकर इस मेले को एक अद्भुत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव बना देते हैं।
कहा जाता है कि ये आयोजन न सिर्फ़ आस्था का प्रतीक है बल्कि गढ़वाली संस्कृति और लोकधरोहर को संजोने का माध्यम भी है।
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