प्रस्थानत्रयम्-Prasthanatrayam-Katha Upanishad - कठोपनिषत्-ByVid.MM.Brahmarishi Dr.Manidravid Sastri
Автор: परमार्थसद्विद्या विवॆक:
Загружено: 2026-01-31
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Part-07
कठोपनिषद् (Kaṭha Upaniṣad)
कठोपनिषद् हिंदू दर्शन के प्रमुख उपनिषदों में से एक है। यह कृष्ण यजुर्वेद से संबंधित है और इसमें आत्मा, मृत्यु, जीवन का उद्देश्य और मोक्ष का गूढ़ ज्ञान दिया गया है।
कथा का सार
कठोपनिषद् की कथा नचिकेता और यमराज के संवाद पर आधारित है।
नचिकेता एक जिज्ञासु और निर्भीक बालक था।
वह यमराज से पूछता है:
“मृत्यु के बाद क्या होता है?”
यमराज उसे सांसारिक सुखों का लोभ देते हैं, पर नचिकेता उन्हें अस्वीकार कर देता है।
अंततः यमराज उसे आत्मविद्या का उपदेश देते हैं।
मुख्य शिक्षाएँ
1. आत्मा का स्वरूप
आत्मा अजन्मा, अविनाशी और शाश्वत है।
वह न तो जन्म लेती है और न मरती है।
“न जायते म्रियते वा कदाचित्…”
आत्मा न कभी जन्म लेती है और न मरती है।
2. श्रेय और प्रेय
श्रेय – कल्याण का मार्ग (आध्यात्मिक)
प्रेय – सुख का मार्ग (इंद्रिय भोग)
विवेकी मनुष्य श्रेय को चुनता है।
3. रथ रूपक (Chariot Metaphor)
शरीर = रथ
आत्मा = रथी
बुद्धि = सारथी
मन = लगाम
इंद्रियाँ = घोड़े
विषय = मार्ग
👉 जो मन और इंद्रियों को वश में रखता है, वही आत्मज्ञान प्राप्त करता है।
4. योग और ध्यान
इंद्रियों और मन का संयम ही योग है।
“तां योगमिति मन्यन्ते स्थिरामिन्द्रियधारणाम्”
5. मोक्ष
आत्मा के ज्ञान से जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिलती है।
संरचना
2 अध्याय
प्रत्येक में 3 वल्ली
कुल 6 वल्ली
महत्व
वेदान्त दर्शन का आधार
आदि शंकराचार्य द्वारा भाष्य
गीता और योग दर्शन पर गहरा प्रभाव
यदि आप चाहें तो मैं:
कठोपनिषद् के प्रमुख श्लोक अर्थ सहित
सरल भाषा में बच्चों के लिए समझाना
कठोपनिषद् पर आधारित चित्र / स्वर्ण-मुद्रा डिज़ाइन
भी कर सकता हूँ। 🙏
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