श्रीमद्भागवत गीता | अध्याय – १७ (श्रद्धात्रय विभाग योग) | Bhagvad Geeta | Little Bit Stories
Автор: Little Bit Stories
Загружено: 2026-02-05
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📜 श्रीमद्भागवत गीता | अध्याय – १७ 🕉️🌱
श्रद्धात्रय विभाग योग | श्रीकृष्ण–अर्जुन दिव्य संवाद
🙏 श्रीमद्भागवत गीता अध्याय – १७ (श्रद्धात्रय विभाग योग) में भगवान श्रीकृष्ण श्रद्धा के तीन स्वरूप — सात्त्विक, राजस और तामस का विस्तार से वर्णन करते हैं। यह अध्याय बताता है कि मनुष्य की श्रद्धा उसके विचार, आहार, कर्म, तप और दान को कैसे आकार देती है।
🌿 सात्त्विक श्रद्धा शुद्धता, शांति और ज्ञान की ओर ले जाती है।
🔥 राजस श्रद्धा फल की इच्छा और अहंकार से जुड़ी होती है।
🌑 तामस श्रद्धा अज्ञान, भ्रम और अंधविश्वास को जन्म देती है।
🕊️ यह अध्याय सिखाता है कि “ॐ तत् सत्” — यह ब्रह्म का संकेत है, जो कर्म, तप और दान को पवित्र बनाता है। सही श्रद्धा से किया गया आचरण ही जीवन को ऊँचा उठाता है।
🎙️ यह Hindi Audio Storytelling प्रस्तुति स्पष्ट, शांत और आत्मचिंतनात्मक शैली में आपको अपनी श्रद्धा की दिशा पहचानने में सहायता करती है।
✨ ध्यान से सुनें और सात्त्विक मार्ग को अपनाएँ।
🕉️ Sanatan Dharma | Shraddha Yoga | Gita Saar | Adhyatmik Gyan
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