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Автор: Gulshan verma
Загружено: 2026-01-08
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Описание:
आज भी तेरा नाम
मेरी खामोशी में है,
भीड़ में हूँ हजारों में
फिर भी तन्हाई में है।
हँसने की कोशिश करता हूँ
पर आँखें सच कह जाती हैं,
हर रात तेरी यादें
मेरी नींद चुरा ले जाती हैं।
तेरे साथ जो सपने देखे,
आज वो अधूरे लगते हैं,
तेरे बिना ये पल
मुझसे रूठे-रूठे लगते हैं।
(कोरस)
आज भी तेरा नाम
दिल से जाता नहीं,
तू दूर है मुझसे
पर एहसास जाता नहीं।
मैं टूट के भी
तुझे चाहने लगा हूँ,
तू मेरा नहीं है
फिर भी तुझे अपना मान चुका हूँ।
(अंतरा 2)
तेरी बातें, तेरी हँसी
अब भी दिल को सताती हैं,
जो साथ बिताए लम्हे थे
आज आँखों को रुलाती हैं।
फोन उठाकर देखता हूँ
कि शायद तेरा मैसेज आए,
पर हर बार स्क्रीन भी
मेरी तरह चुप रह जाए।
लोग कहते हैं भूल जा उसे,
वो तेरा नसीब नहीं थी,
पर उन्हें क्या पता
वो मेरी पूरी दुनिया थी।
(कोरस)
आज भी तेरा नाम
हर दुआ में आता है,
तू साथ नहीं है
फिर भी दिल तुझको चाहता है।
मैं जानता हूँ
मिलना मुमकिन नहीं,
फिर भी ये दिल
मानने को तैयार नहीं।
(अंतरा 3)
वक़्त ने सब बदल दिया,
बस मैं ही वहीं रुक गया,
तू आगे बढ़ती रही
और मैं पीछे छूट गया।
तेरी खुशियों की खबरें
जब लोगों से सुनता हूँ,
मुस्कुरा देता हूँ बाहर से
पर अंदर से टूट जाता हूँ।
कभी-कभी खुद से पूछता हूँ
गलती मेरी कहाँ थी,
मैंने तो सिर्फ प्यार किया
फिर सजा इतनी बड़ी क्यों थी?
(ब्रिज – बहुत स्लो और दर्द भरा)
अगर गलती मेरी थी
तो सजा कुबूल है,
बस एक बार तू कह दे
कि तुझसे भी ये दूरी मजबूर है।
मैं तुझे बदनाम नहीं करूँगा,
ना कोई सवाल उठाऊँगा,
बस तेरी यादों के सहारे
अपनी बाकी ज़िंदगी बिताऊँगा।
(अंतिम कोरस – सॉफ्ट लेकिन डीप)
आज भी तेरा नाम
मेरी साँसों में रहता है,
तू पास नहीं है
फिर भी दिल तुझसे ही कहता है।
मैं जी तो रहा हूँ
पर वो बात नहीं रही,
तेरे जाने के बाद
मेरी कोई रात नहीं रही।
(आउट्रो)
अगर कभी थक जाए तू
इस झूठी दुनिया से,
तो याद रखना…
कोई आज भी तुझे
टूट कर चाहता है।
आज भी तेरा नाम…
बस आज भी तेरा नाम…
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