गृहारम्भ, नींव पूजन, शिलान्यास मुहूर्त के वास्तु शास्त्रीय नियम। वास्तुशास्त्र। Pandit Rajesh Mishra
Автор: @Acharya_Dr_Rajesh_Mishra
Загружено: 2020-12-02
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गृहारम्भ प्रक्रिया के दो भाग हैं। पहला नींव खुदाई या खात और दूसरा शिलान्यास।
नींव खुदाई अधोमुख नक्षत्र में की जाती है। अधोमुख नक्षत्र भरणी, कृतिका, आश्लेषा, मघा विशाखा, मूल , पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ और पूर्वभाद्रपद होते हैं। इन अधोमुखी नक्षत्रों में नींव खुदाई खात, नलकूप खनन, कुआ खोदना, तलाव खोदना, बावड़ी, गड्ढा खोदना एवं गणित विद्या अनुसंधान प्रारम्भ करना चाहिए।
शिलान्यास या गृहारम्भ या वास्तु पूजन के नक्षत्र पुष्य, मृगशिरा, अनुराधा, धनिष्ठा, शतभिषा, तीनों उत्तरा, हस्त, चित्रा, स्वाति, रोहिणी, और रेवती नक्षत्रों में करना चाहिए।
गृहारम्भ के शुभ वार सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार हैं।
गृहारम्भ के शुभ मास वैसाख, आसाढ़, श्रावण, कार्तिक, अगहन, पौष, माघ और फाल्गुन हैं। सौर मास मेष, वृष, कर्क, सिंह, तुला, वृश्चिक, मकर और कुम्भ के सूर्य में गृहारम्भ शुभ होता है।
गृहारम्भ के समय गुरु शुक्र उदय होना चाहिए। गुरु शुक्र नीच या अस्त नही होना चाहिए।
गृहारम्भ के समय भूमि शयन नही होना चाहिए। सूर्य के नक्षत्र से अभिजीत सहित चंद्र नक्षत्र तक गिनने पर यदि 5, 7, 9, 12, 19 ,26 संख्या आवे तब भूमि शयन होता है।
गृहारम्भ के समय बृषभ चक्र शुद्धि भी होना चाहिए। सूर्य के नक्षत्र से अभिजीत सहित चंद्र नक्षत्र तक गिनने पर यदि 8, 9, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18 आवे तब शुभ होता है। 1 से 7 तथा 19 से 28 संख्या अशुभ होती है।
गृहारम्भ के समय पंचांग शुद्धि भी होना चाहिए। भद्रा व्यतिपात, क्रांतिसाम्य नही होना चाहिए। गृहारम्भ के समय लत्ता, वेध, युति, उपग्रह इत्यादि 10 दोष नही होना चाहिए।
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