नवार्ण मंत्र: ब्रह्मांड की शक्ति | Ucharan, Nyas, और Awaran Puja | Secrets of Navaarn Mantra
Автор: Journeys with Maa
Загружено: 2025-03-31
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मंत्र : ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
Source for the information:
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1. Devi Bhagwat Puran
2. Mantra Mahodadhi
3. Sharada Tilak Tantram
Topics covered:
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बीज मंत्र क्या होते है और नवार्ण मंत्र के बीज मंत्र
नवार्ण मंत्र - उच्चारण (गकार में करे या मकार में?)
नवार्ण मंत्र - देवी भागवत पुराण में वर्णित मंत्र की संरचना और शक्तिओं की जानकारी , भगवती के यंत्र का वर्णन
न्यास - नवार्ण मंत्र के न्यास की जानकारी और कैसे अलग अलग न्यास अलग अलग मनोकामनाओं की पूर्ति करते है
Detailed document for Awaran Puja along with various Nyas and Viniyog of Navaarn Mantra:
(will be available in 2-3 months and will be shared only by mail)
Email: [email protected]
आवरण पूजा के लिए विस्तृत दस्तावेज, नवार्ण मंत्र के विभिन्न न्यास और विनियोग के साथ:
(यह 2-3 महीनों में उपलब्ध होगा और केवल ईमेल के माध्यम से साझा किया जाएगा)
Email: [email protected]
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शक्ति सधना में गुरु, गणपति, शिव, भैरव, बटुक , कवच, क्षमा प्रार्थना इत्यादि बहुत ज़रूरी है
रक्षात्मक देवता और अंग देवता की अवहेलना ना करे
अष्टांग योग जीवन का अंग होना चाहिए और शक्ति साधना में बहुत अधिक आवश्यक है
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क्या नवार्ण मंत्र भयानक है?
श्रीनारायण बोले - [हे नारद!] अब मैं उन भगवती दुर्गके उत्तमोत्तम नवाक्षर मन्त्रका वर्णन करूँगा। सरस्वतीबीज (ऐं), भुवनेश्वरीबीज (ह्रीं) और कामबीज (क्लीं)-इन तीनोंका आदिमें क्रमश: प्रयोग करनेके बाद "चामुण्डायै" -- इस पदको लगानेके अनन्तर "विच्चे" इन दो अक्षरोंको जोड़ देनेपर बना हुआ "ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" - यह नवाक्षर मन्त्र कहा गया है, जो जप करनेवाले मनुष्यके लिये कल्पवृक्षके समान है॥ ५७-५८ ॥ - देवी भागवत पुराण (नवम स्कन्द)
उत्तमोत्तम - उत्तम से भी उत्तम!
कल्पवृक्ष - सभी कामनाओं की पूर्ति करने वाला वृक्ष
नवार्ण मंत्र से शक्तिशाली मंत्र नहीं है क्योकि इसमें आदि पराशक्ति से सभी रूप समाहित है - उग्र भी और सौम्य भी। ये मंत्र सिर्फ़ असुरी प्रवृतियों वाले मनुष्यों के लिए भयानक है , सरल - धर्माचारी - अष्टांग योग को मानने वालो और भगवती को जी-जान से समर्पित मनुष्यों के लिये ये मंत्र उत्तमोत्तम और कल्पवृक्ष समान है जैसे श्रीनरायण देवी भागवत पुराण में बता रहे है।
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कुछ वीडियो लिंक:
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Ashtang Yog (Yam Niyam):
• Ashtang Yog: Yam - Niyum, Sagarbh Pranayam...
गुरु ना होने की स्तिथि में क्या करे? देव दीक्षा विधान, माँ या स्त्री से मिले मंत्र, स्वप्नलब्ध मंत्र (सपने में मिले मंत्र)
• शक्ति साधना रहस्य: स्वप्नलब्ध मंत्र और देव...
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देव दीक्षा विधान (Dev Deeksha Vidhan)
उत्तम गुरु ना होने की दशा में मंत्र ग्रहण करने का विधान!
यामले-
यह तब करे, जब उत्तम गुरु प्राप्त न हों ।सद्गुरू के प्राप्त होने पर उन्हीं से मन्त्र ग्रहण करना चाहिये
गुरोरभावे . मन्त्राणां ग्रहणक्रममुच्यते । कृष्णपक्षे त्रयोदश्यां दक्षिणामूर्त्तिसबन्निधौ ॥ ४२ ॥
लिखित्वा राजते पत्रे तालपत्रेड थवा पुनः ।मन्त्रं ततू स्थण्डिले स्थाप्य पूजयित्वा महेश्वरम्॥ ४३ ॥
पायसादि निवेद्यं च कृत्त्वा तं प्रणिपत्य च ।
शतकृत्त्व: पठेन्मन्त्र दक्षिणामूर्त्तिसन्निधौ ।
सर्वेषां चैब मन्त्राणामेवं ग्रहणमिष्यते ॥ ४४
यामल में भी बतलाया गया है कि - कृष्णपक्ष में त्रयोदशी के दिन, दक्षिणामूर्ति के सन्निकट, चाँदी के पत्र पर अथवा ताम्र पत्र पर, मंत्र लिख कर, वेदी पर स्थापित करे। फिर महेश्वर की पूजा कर पायस आदि का नैवेद्य समर्पित कर तदंतर उन्हें प्रणाम कर सौ बार मंत्र का पाठ दक्षिणामूर्ति के सन्निघान में करे - इस प्रकार सभी मंत्रों का विधान कहा गया है
आगमरहस्यम्
(शैवागमान्तर्गुतम्)
डॉ० सुधाकर मालवीयः एम.ए., पीएच.डी., साहित्याचार्य :, निदेशक: महामना संस्कृत अकादमी (लब्धावकाश:) संस्कृत विभाग:, कलासझ्लाय: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय:, वाराणसी
चौखम्बा संस्कृत सीरीज
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Navaarn Mantra and Deeksha:
Many traditions do recommend that powerful Beej mantras like the Navaarn mantra be taken through a Guru, especially if someone is planning to do a full-fledged anushthan or deep tantra-based practice. A Guru can help correct the uchharan, guide the nyas, and ensure the sadhak is mentally, energetically, and karmically prepared.
But at the same time, our own Shastras also acknowledge "Dev Deeksha"—when a seeker, out of pure devotion and inner readiness, is guided directly by the Divine (like Bhagwati herself or Mahadev). In fact, many great mantras have been revealed to sadhaks through dreams, intuition, or deep bhakti.
The key is intention, purity, and commitment. If someone is approaching the mantra with humility, devotion, and a disciplined lifestyle (especially following Ashtang Yog principles), then Bhagwati herself becomes the Guru. That said, one should avoid doing large-scale japa or anushthan without full understanding, and ideally seek guidance—either through a Guru or authentic scriptures.
So yes—with awareness and bhakti, it is possible, but never casually or carelessly.
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