ठंड में चटपटे आलू चाट वाली, ||Hindi cartoon stories||Spicy Potato Chaat for Winter ।
Автор: Moto TV
Загружено: 2026-01-19
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Title — Spicy Potato Chaat for Winter
Characters
Miserly Family
Miserly Mother-in-Law - Shobha
Age - 50 years
Father-in-Law - ravi
Age - 55 years
Village Daughter-in-Law - Neha
Age - 26 years
Sonali's Husband - Amit
Age - 30 years
Sonali's Son - bablu
Age - 5 years
Sonali's doughter - mira
age- 10 years
Story Start
ठंड में चटपटे आलू चाट वाली।
Customer
[हंसी] अरे भैया जल्दी से एक फुल प्लेट गरमा गरम चाट लगा दो।
Narration
ऑर्डर देकर ग्राहक ठंड से हाथ मलते हुए रेस्टोरेंट के अंदर आकर हीटर की गर्माहट में बैठ जाता है। बाहर ठंड की गर्दिश कोहरे की धुंध में साफ दिख रही थी। ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी।
Customer
अरे भाई ज्यादा टाइम लगेगा क्या? 2 मिनट हो गया।
Malik
अरे बस बस भाई साहब चाट तो बनकर तैयार है। अभी फटाफट से आपका आर्डर टेबल पर लगवाता हूं। 2 मिनट दीजिए।
Narration
इतना कहकर कमलेश रेस्टोरेंट के रसोई में आता है। जहां तीन मजदूर ठंड में मोमोज बनाने में लगे थे। वहीं मोहित को आलू छिलता देखकर मालिक आग बबूला हो जाता है।
Malik
क्यों बे मोहित? इतनी देर से तू अभी तक आलू छिलने में में लगा पड़ा है। जल्दी-जल्दी हाथ चला। फटाफट से मुझको 5 मिनट के अंदर चाट तैयार चाहिए।
मोहित
पर सेठ 5 मिनट में आलू चाट तैयार नहीं हो पाएगी। टाइम लग जाएगा क्योंकि अभी तो आधे से ज़्यादा आलू बचा हुआ है। ऊपर से आपने आलू भी खराब मंगवा लिया। आलू साफ होता तो फटाफट काट देता।
Narration
मोहित के इतना बोलते ही कमलेश गुस्से में पिन कर सुनाने लगता है।
Malik
अरे तू चाहता क्या है? अब मैं ₹50 प्लेट की चाट में ताजा माल इस्तेमाल करूं। इतना मार्जिन नहीं है रेस्टोरेंट का। मुझे अपना मुनाफा भी तो देखकर चलना होता है। ऊपर से एक तारीख लगते मुंह फाड़ कर तू सबसे पहले तनख्वाह मांगने लग जाता है। चल अब मुंह कम चला और हाथ ज्यादा चला।
Narration
मोहित की वाजिब बात पर भी कमलेश उसे खरी-खोटी सुना डालता है। जबकि बाकी सब मजदूर की तुलना में मनोहर सबसे स्वादिष्ट और चटपटी चाट बनाता था। उसके स्वाद के चलते कमलेश के रेस्टोरेंट आसपास के जितने भी रेस्टोरेंट थे उनसे सबसे ज्यादा अच्छा खासा चलता था। इसके बावजूद भी कमलेश मनोहर को ₹8000 ही देता था। जिसमें उसकी पत्नी सीमा महीने भर के घर परिवार के खाने का खर्चा बहुत ही मुश्किल से चला पाती थी।
मोहित
जी तोड़ मेहनत के बाद भी ना तो ढंग की तनख्वाह मिलती है। ऊपर से यह सेठ जब देखो हर बात के लिए मुझ पर ही राशन पानी लेकर चढ़ जाता है। जैसे मेरी [संगीत] तो कोई इज्जत ही नहीं है। एक बार कहीं ढंग का काम मिल जाए तो देखकर यहां से छोड़ दूंगा।
Narration
मायूस होकर मोहित जल्दी-जल्दी चाट बना करके ठंड में थर-थर करते हुए टेबल पर लाता है। तभी कस्टमर अकड़ते हुए बोलता है।
Customer
अरे वह टेबल पर कपड़ा तो मार देता। जरा सी भी सफाई नहीं दिख रही है।
Narration
टेबल गंदा पड़ा देखकर ग्राहक मुंह सिकोड़ लेता है।
मालिक
अबे घनचक्कर अब खड़े-खड़े क्या देख रहा है? फटाफट से सभी कुर्सी टेबल पर कपड़ा मार।
मोहित
पर सेठ यह काम मेरा थोड़ी ना है। मेरा जितना काम है, मैं उससे ज्यादा करता हूं। तुमने जो साफ सफाई वाला रख रखा है, यह काम उसका है।
Narration
मोहित को रेस्टोर में बैठे कस्टमर के आगे जवाब देते देखकर कमलेश गुस्से में दांत पीसकर बेइज्जती करता है।
Malik
अरे हरामखोर तू क्या इस रेस्टोरेंट का मालिक लग रहा है जो तू मुझे बताएगा? मुझे कब कौन सा काम किससे लेना है? अरे मैंने तुझको फ्री फंड की तनख्वाह देने के लिए नहीं रखा है। अब जल्दी से कपड़ा उठा और टेबल साफ कर। मुझे टेबल दूध की तरह चमकता हुआ दिखना चाहिए। काम का न काज का दुश्मन आज का।
Narration
बड़बड़ाते हुए कमलेश अपनी नरम मुलायम कुर्सी पर बैठकर हीटर की गरमागरम हवा खाने लगता है। वहीं बेचारा गरीब मोहित ठंड में ठिठुर ठिठुर कर सभी टेबल को गीले कपड़े से पोछता है और रात के जितनी देर तक रेस्टोरेंट चलता है। वो आखिर तक रुका रहता है जबकि चाट बनाने वाले बाकी सभी मजदूर शाम के 7 8:00 बजे निकल जाते हैं।
राजेन्द्र
अरे मोहित तू भी टाइम से घर निकल जा। कितना ज्यादा कोहरा और धुंध हो रहा है। आज का मौसम भी खराब हो रखा है।
मोहित
राजेन्द्र भैया तुम निकल जाओ। मैं तो 10:00 बजे के बाद ही जाऊंगा।
भयंकर ठंड में मोहित की गरीबी लाचारी और कहीं ना कहीं उसके मन में थोड़े पैसे ज्यादा मिलने का लालच भी था क्योंकि कमलेश लगभग 2 घंटे रुक कर बदले में ₹20 30 दे दिया करता था।
Malik
अरे हीटर के आगे बैठकर मोहित ऐसा कर अब जल्दी से रेस्टोरेंट बढ़ा दे क्योंकि 10:00 बज गए हैं। ठंड का मौसम हो रखा है। अब कोई ग्राहक नहीं आएगा।
मोहित
जी ठीक है सेठ।
Narration
कुछ देर में सारे मसाले ,तेल सब कुछ लाकर मोहित रसोई में रख देता है और दिन भर की दिहाड़ी मिलने के आस में कमलेश का मुंह देखने लगता है।
मोहित
अच्छा मैं निकलता हूं।
मालिक
अरे रुक यह ₹30 रख। 10:00 बजे तक रुकने के बदले बाकी तनख्वाह का हिसाब एक तारीख को करता हूं।
मोहित
बहुत-बहुत शुक्रिया सेठ जी।
Narration
रेस्टोरेंट से बाहर निकलते भयंकर ठंड से मोहित के हाथ पैर सिहरने लगते हैं। बर्फीली हवा और घने कोहरे में सिकुड़ते हुए वह घर की तरफ बढ़ता है। जहां उसका पूरा का पूरा गरीब परिवार टूटे छत वाले मकान में बैठकर उसका रास्ता देख रहे थे। बाहर बह रही ठंडी बर्फ भरी हवा को देखकर शोभा की आंखों में नमी थी।
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