श्री दुर्गासप्तशती - देव्यपराधक्षमापन स्तोत्र - SHRI DURGA SAPTSHATI - DEVYAPRADHKSHMAPAN STOTRA
Автор: Sanatan Sangrah
Загружено: 2026-01-31
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श्री दुर्गासप्तशती - देव्यपराधक्षमापन स्तोत्र - SHRI DURGA SAPTSHATI - DEVYAPRADHKSHMAPAN STOTRA
आदि शंकराचार्य द्वारा रचित देव्यपराध क्षमापन स्तोत्र के पाठ से अनजाने में हुई पूजा की गलतियों, पापों और अपराधों के लिए माता दुर्गा से क्षमा मिलती है। यह स्तोत्र मानसिक शांति, सुख-समृद्धि, भय से मुक्ति, कुपुत्र को सुपुत्र में बदलने और अंततः देवी की कृपा प्राप्त करने में अत्यंत फलदायी माना जाता है।
देव्यपराध क्षमापन स्तोत्र के मुख्य फल (लाभ):
यह साधक द्वारा अनजाने में हुई गलतियों, पूजा-विधि में कमी, या मन्त्र/यन्त्र न जानने की कमी को क्षमा कर मन और आत्मा को शुद्ध करता है।
इसका पाठ करने से जीवन में भौतिक सुख-सुविधाओं के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त होती है।
यह सभी प्रकार के कष्टों, विपत्तियों और भय को दूर करता है।
मान्यता है कि इस स्तोत्र के श्रवण मात्र से मूर्ख व्यक्ति भी मधुर वाणी का धनी (उत्तम वक्ता) बन सकता है।
यह निर्धनता को दूर कर सुखी जीवन का आशीर्वाद देता है।
यह एक कुपुत्र को भी माता के स्नेह का पात्र बनाता है, यह स्थापित करता है कि "कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति" अर्थात पुत्र कुपुत्र हो सकता है, लेकिन माता कुमाता नहीं हो सकती।
पाठ के लिए नियम:
शुक्रवार के दिन इस स्तोत्र का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है।
इस स्तोत्र का पाठ शाम के समय करना अधिक उचित होता है।
इस स्तोत्र का पाठ करने से पहले मन में विनम्रता और भक्ति का भाव रखना आवश्यक है
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