राजकुमारी का विवाह मुर्दे के साथ।राजकुमारी का धैर्य,त्याग और एक दासी का छल।
Автор: Dharm Gyan Hindi Kahaniya
Загружено: 2026-02-24
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राजकुमारी का विवाह मुर्दे के साथ।राजकुमारी का धैर्य,त्याग और एक दासी का छल।#धार्मिककहानियां,
डिस्क्रिप्शन:- यह कहानी गुणवंती नाम की एक सरल, करुणामयी और संस्कारी लड़की की है। जिसका जीवन भाग्य, विश्वासघात और अंततः सत्य की विजय का अद्भुत उदाहरण बन जाता है। गुणवंती एक राजकुमारी थी, जिसके गुरु ने भविष्यवाणी की थी कि उसका विवाह एक मृत व्यक्ति से होगा। इस भविष्यवाणी से भयभीत होकर उसके माता-पिता उसे लेकर दूसरे नगर में एक योग्य राजकुमार की तलाश में निकल पड़े। यात्रा के दौरान वे एक रहस्यमय महल में रुकते हैं। संयोगवश गुणवंती पहले महल में प्रवेश कर जाती है और अचानक महल का द्वार बंद हो जाता है। उसके माता-पिता बाहर ही रह जाते हैं और उसे अकेला उसी महल में रहना पड़ता है।
एक दिन भूख लगने पर वह भोजन बनाने के लिए चूल्हे के पास जाती है। चूल्हे की राख हटाते ही वह राख उड़कर उसकी मांग में भर जाती है और चमत्कारिक रूप से सिंदूर में बदल जाती है। यह संकेत था कि उसका विवाह हो चुका है, पर उसे इसका अर्थ समझ नहीं आता। उसी महल में एक मृत शरीर पड़ा होता है, जिसकी आँखों पर घास जमी होती है। गुणवंती को उसे छूने से मना किया गया था।
कुछ समय बाद एक भिखारिन स्त्री उसके द्वार पर आती है। दया से प्रेरित होकर गुणवंती उसे महल में आश्रय दे देती है, भोजन और वस्त्र देती है। लेकिन एक दिन जब गुणवंती मंदिर जाती है, वह भिखारिन उसकी आज्ञा भूलकर मृत शरीर की आँखों से घास हटा देती है। तुरंत ही वह मृत शरीर एक सुंदर राजकुमार में बदल जाता है। यही वह व्यक्ति था, जिससे गुणवंती का विवाह होना नियति में लिखा था।
भिखारिन चालाकी से राजकुमार को यह विश्वास दिला देती है कि उसी ने उसकी सेवा की है। परिणामस्वरूप राजकुमार उससे विवाह की तैयारी करने लगता है और गुणवंती को दासी समझ लिया जाता है। गुणवंती मन ही मन पीड़ा सहती रहती है और अपनी कठपुतली से अपने दुख साझा करती है। एक दिन संयोग से राजकुमार उसकी सच्चाई सुन लेता है और उसे सच्चाई का ज्ञान होता है।
विवाह के दिन वह दासी के स्थान पर गुणवंती को मंडप में बैठाता है और उससे विवाह करता है। जब भिखारिन को सच्चाई का पता चलता है, तो वह क्रोधित होकर विरोध करती है, लेकिन अंततः अपनी भूल स्वीकार कर राजकुमार और गुणवंती से क्षमा मांगती है। राजकुमार उसे उसके विश्वासघात के लिए डांटता है, और गुणवंती अपनी उदारता और गरिमा से सबका मन जीत लेती है।
अंत में सत्य की विजय होती है, न्याय स्थापित होता है और गुणवंती अपने राजकुमार के साथ सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करने लगती है।
इस कहानी के अंत में एक चिड़ा अपनी चिड़िया को यह कथा सुनाकर समझाता है कि दया करना एक महान गुण है, परंतु दया विवेक के साथ करनी चाहिए। कुछ लोग उपकार का उत्तर विश्वासघात से देते हैं। इसलिए मनुष्य को दया करते समय समझदारी भी रखनी चाहिए।
यह कथा हमें सिखाती है कि सत्य और धैर्य अंततः जीतते हैं, और छल-कपट का परिणाम लज्जा ही होता है।
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