आकाशवाणी से काँप उठा कंस | श्रीकृष्ण अवतार की पूर्वकथा | कथा सागर
Автор: Tilak
Загружено: 2026-02-13
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विवाह के पश्चात कंस स्वयं देवकी और वासुदेव का सारथी बनकर उन्हें उनके राज्य की ओर ले चला। मार्ग में ही आकाशवाणी गूँजी कि कंस का अंत उसकी ही बहन देवकी की आठवीं संतान के हाथों निश्चित है। यह सुनते ही कंस का चेहरा क्रोध से तमतमा उठा और भविष्य के भय को मिटाने के लिए वह देवकी का वध करने को उद्यत हो गया। उसी क्षण वासुदेव ने उसे रोक लिया और धर्म की प्रतिज्ञा लेते हुए कहा कि देवकी से जन्म लेने वाली प्रत्येक संतान वह स्वयं कंस को सौंप देगा। वासुदेव के वचन ने कंस के हाथ तो रोक दिए, पर उसका हृदय और भी कठोर हो गया। उसने तत्काल अपने सेनानायक को आदेश दिया कि देवकी और वासुदेव को उनके ही भवन में कठोर पहरे के साथ बंदी बना दिया जाए। पल भर में उनका राजमहल अंधकारमय कारागार में बदल गया।
अम्बर ने जब गरजा तो कंस हुआ आशंकित
और हुआ फिर उसका मन क्षण भर में परिवर्तित
यकीं नहीं वो कर पाया कि लिखा है उसका अंत
वध करने हैं वाले उसका नारायण भगवंत
अब ना कर पायेगा वह जन पर अत्याचार
खो देगा वह मथुरा पर शासन का अधिकार
साध सका ना कंस जरा विधि का यह खेल
मौत से ना रखना उसको कोई भी है मेल
भाग्य बदलकर चाहे वह बनना अविनाशी
लेकिन उसके अंत को तो लिख चुके गिरिधारी
#Ramayan #TilakDarshan #KathaSagar
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