बर्बाद नौजवानों के लिए बेहद जरूरी जानकारी
Автор: Asali Brahmcharya
Загружено: 2025-12-20
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ब्रह्मचर्य को यदि जीवन-अनुशासन के व्यापक संदर्भ में देखा जाए, तभी उसका वास्तविक लाभ मिलता है। इस पर कुछ विचार इस प्रकार हैं—
ब्रह्मचर्य केवल शारीरिक संयम नहीं, बल्कि ऊर्जा के सही दिशा में उपयोग की कला है। यह मन को स्थिर करता है, इंद्रियों को नियंत्रित करता है और व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाता है। लेकिन यह भी सत्य है कि केवल ब्रह्मचर्य अपनाने से सम्पूर्ण स्वास्थ्य अपने-आप नहीं बनता।
यदि खान-पान असंतुलित हो—अत्यधिक तला-भुना, रासायनिक, या समय पर भोजन न हो—तो शरीर कमजोर होगा, चाहे व्यक्ति कितना ही संयमी क्यों न हो।
उसी प्रकार यदि शरीर को नियमित व्यायाम, योग, प्राणायाम और चलने-फिरने का अभ्यास न मिले, तो ऊर्जा जड़ हो जाती है और रोग जन्म लेते हैं।
स्वस्थ जीवन के तीन स्तंभ हैं—
ब्रह्मचर्य, शुद्ध आहार और नियमित व्यायाम।
ब्रह्मचर्य ऊर्जा को बचाता है,
अच्छा खान-पान ऊर्जा को पोषण देता है,
और व्यायाम ऊर्जा को सक्रिय व संतुलित करता है।
इन तीनों में से किसी एक की कमी पूरे संतुलन को बिगाड़ देती है। अनुशासन के बिना ब्रह्मचर्य बोझ बन सकता है और अनुशासन के साथ यह जीवन को तेजस्वी, शांत और सृजनशील बना देता है।
इसलिए सच्चा ब्रह्मचर्य वही है, जो
सही समय पर सोने-जागने, संतुलित भोजन, नियमित परिश्रम और सकारात्मक सोच के साथ जुड़ा हो।
ऐसा जीवन न केवल शरीर को स्वस्थ बनाता है, बल्कि मन और आत्मा को भी ऊँचाई देता है।
महंत आनंद स्वामी
कृष्ण मंदिर गीता धाम
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