ब्राह्मण को वरण करते समय बोला जाने वाला वैदिक मंत्र ।। By.. Acharya Abhinesh Tiwari।।
Автор: Acharya Abhinesh Tiwari
Загружено: 2021-01-30
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ब्राह्मण वरण मंत्राणि
*यजमान ब्राह्मण का वरण किस मंत्र से कर सकते हैं *
ॐ ब्रह्म जज्ञानं प्रथम पुरस्ताद्वि सीमतः सुरुचो वेन ऽआव : । स बुध्या ऽउपमा ऽअस्य विष्ठाः सतश्च योनिमसतश्च वि वः ।। ( 13/3)
ॐ बृहस्पते अति ऽयदर्यो अर्हाद्घुमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु । यद्दीदयच्छवस ऽऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम् उपयामगृहीतोसि बृहस्पतये त्वैष ते योनिवृहस्पतये त्वा ।। ( 26/3)
ॐ बृहस्पते सवितर्बोधयैन गुं स गुं शितं चित्सन्तरा गुं स गुं शिशाधि । वर्धयैनं महते सौभगाय विश्व ऽएनमनु मदन्तु देवाः ।। ( 27/8)
ॐ ब्रह्मणे ब्राह्मणं क्षत्राय राजन्यं मरुद्भयो वैश्यं तपसे शूद्रं तमसे तस्करं नारकाय वीरहणं पाप्मने क्लीब माक्रयाया ऽअयोगू कामाय पुंश्चलूमतिक्रुष्टाय मागधम् ।। ( 30/5)
ॐ सदसस्पतिमद्भुतं प्रियमिन्द्रस्य काम्यम् । सनिं मेधामयासिष स्वाहा ।। ( 32/13)
ॐ ब्रह्मणस्पते त्वमस्य यन्ता सूक्तस्य बोधि तनयं च जिन्व विश्वं तद्भद्रं यदवन्ति देवा बृहद्वदेम विदथे सुवीरा : । यऽइमा विश्वा विश्वकर्मा यो नः पितान्नपतेन्नस्य नो देहि ।। ( 34/58)
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