नए अड्डे की तलाश में सारंडा के माओवादी। पश्चिम सिंहभूम
Автор: News Aapka
Загружено: 2026-03-07
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नए कैडर को जोड़ने की जद्दोजहद में माओवादी, कर रहे हैं नए अड्डे की तलाश
माओवादी का एक सिविल दस्ता लगातार कुलातुपु, बड़ी कुदार, जामारडीह , काशीगड़ा चालीस गांव, jojo डेरा, marchi कुदार आदि गांवों में सक्रिय है जो लगातार लोगों से संपर्क करने की कोशिश में जुटे हैं ।
झारखंड के कोल्हान–सारंडा क्षेत्र में 23 जनवरी को हुई मुठभेड़ के बाद माओवादी संगठन को भारी झटका लगा है। इस मुठभेड़ में माओवादी दस्ते को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा और कई कैडर मारे गए, जिसके बाद संगठन की गतिविधियां काफी कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं। अपने पूरे दस्ते को गंवाने के बाद माओवादी अब संगठन को फिर से खड़ा करने के लिए नए कैडर जोड़ने और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में जुट गए हैं।
जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2023 में कोल्हान क्षेत्र से निकलकर माओवादी संगठन ने सारंडा के घने जंगलों को अपना ठिकाना बनाया था। बाबूडेरा, राधापौड़ा, डोलाई, हेंदेकुली समेत कई इलाके लंबे समय तक माओवादियों का मजबूत गढ़ माने जाते थे। इन क्षेत्रों में माओवादी संगठन का मुख्यालय भी संचालित होता था और यहीं से संगठन अपनी गतिविधियों को अंजाम देता था।
लेकिन पिछले कुछ समय से सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान और जंगलों के अंदर सुरक्षा कैंप स्थापित किए जाने से माओवादियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बाबूडेरा, राधापौड़ा, डोलाई और हेंदेकुली जैसे इलाकों में सुरक्षा बलों की स्थायी मौजूदगी के कारण माओवादियों को इन क्षेत्रों से मजबूरन पलायन करना पड़ा है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार हो रही कार्रवाई और कैंपों के विस्तार से माओवादी संगठन का नेटवर्क कमजोर पड़ा है। जहां पहले ये इलाके माओवादियों के लिए सुरक्षित माने जाते थे, वहीं अब सुरक्षा बलों की पैठ बढ़ने से उनके लिए यहां टिक पाना मुश्किल हो गया है।
मौजूदा स्थिति में माओवादी संगठन दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। एक ओर संगठन में कैडरों की भारी कमी हो गई है, वहीं दूसरी ओर उनके पास स्थायी ठिकाना भी नहीं बचा है। ऐसे में संगठन नए युवाओं को अपने साथ जोड़ने और जंगलों में नए सुरक्षित अड्डों की तलाश में जुटा हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, माओवादी संगठन आसपास के इलाकों में फिर से अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सुरक्षा बलों की लगातार निगरानी और अभियान के कारण उनकी गतिविधियां सीमित होती जा रही हैं। सुरक्षा एजेंसियां भी इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि माओवादी किसी नए क्षेत्र में अपना ठिकाना न बना सकें।
इधर सुरक्षा बलों का कहना है कि जंगलों में लगातार सर्च अभियान चलाया जा रहा है और माओवादियों की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में भी नक्सल विरोधी अभियान और तेज किए जाएंगे, ताकि क्षेत्र को पूरी तरह माओवादी मुक्त बनाया जा सके।
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