Mela Baba Sodal Da Jalandhar 2025 || ਅੱਜ ਮੇਲੇ ਦਾ ਦੂਸਰਾ ਦਿਨ | ਲੱਖਾਂ ਸੰਗਤਾਂ ਨਤਮਸਤਕ ਹੋਇਆਂ ||
Автор: My life moments
Загружено: 2025-09-07
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Описание:
बाबा सोढल जालंधर के चड्ढा परिवार में जन्मे थे और उनकी मां जब कपड़े धोने तालाब जाती थीं, तो वह उनका पीछा करते थे. परेशान होकर मां ने उन्हें तालाब में कूदने को कहा, और आज्ञाकारी पुत्र के रूप में सोढल ने तालाब में छलांग लगा दी और फिर कभी दिखाई नहीं दिए. माना जाता है कि इसके बाद वे कई बार प्रकट हुए और अपने चड्ढा समुदाय को एक विशेष प्रकार का प्रसाद, यानी टोपा से बना साँप, चढ़ाने का निर्देश दिया, जो अब सोढल मेले का मुख्य आकर्षण है.
बाबा सोढल की कथा का विस्तार से वर्णन
जन्म और बचपन:
बाबा सोढल का जन्म पंजाब के जालंधर शहर में खत्री जाति के चड्ढा परिवार में हुआ था.
माँ के साथ तालाब जाना:
जब सोढल छोटे थे, तो वह हर बार अपनी माँ के साथ कपड़े धोने के लिए तालाब पर जाते थे, भले ही माँ उन्हें डांटती रहती थीं.
तालाब में कूदना:
एक बार उनकी माँ ने गुस्से में आकर उनसे तालाब में कूदने को कहा. सोढल ने माँ की आज्ञा का पालन करते हुए तालाब में छलांग लगा दी और फिर कभी वापस नहीं आए. कुछ कथाओं के अनुसार, वह बहुत अधिक दूध पीने के कारण भी अपना भौतिक रूप त्याग चुके थे.
अवतार और निर्देश:
कहा जाता है कि इसके बाद बाबा सोढल कई बार प्रकट हुए और उन्होंने अपने चड्ढा समुदाय को एक विशेष भेंट चढ़ाने का निर्देश दिया.
टोपा का प्रसाद:
बाबा सोढल ने निर्देश दिया कि चड्ढा समुदाय वाले स्थानीय आटे से बने साँप (टोपा) को चढ़ाएं. यह भेंट अब भादों माह की चतुर्दशी को आयोजित होने वाले बाबा सोढल मेले का एक महत्वपूर्ण और पारंपरिक हिस्सा है.
सोढल मेला:
यह मेला हर साल भादों माह की चतुर्दशी को आयोजित होता है और चड्ढा समुदाय के लोग इससे जुड़े सख्त रीति-रिवाजों का पालन करते हैं.
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