हरिकेश पटवारी जी का जीवन परिचय⭐Harikesh Patwari Ka Jivan Parichay🖋️Harikesh Patwari New Video
Автор: NAIN DIGITAL
Загружено: 2021-04-30
Просмотров: 8337
Описание:
Harikesh Patwari Ka Jivan Parichay Harikesh Patwari New Video
Click the link to discover more about "harikesh patwari ka jivan parichay" topic , please check out: ?
This video is about "harikesh patwari ka jivan parichay" topic but we also try to cover the subjects:
-hariyanvi bhajan
-harikesh patwari
-harikesh patwari hit ragni
harikesh patwari ka jivan parichay
harikesh patwari ki ragani
harikesh patwari ragni
harikesh patwari ka bhajan
harikesh patwari
harikesh patwari ki ragni
harikesh patwari ke bhajan
You have actually reached this YT vid due to the fact that you showed interest in harikesh patwari ka jivan parichay, this video will certainly cover also: hariyanvi bhajan
One thing I noticed when I was researching information on harikesh patwari ka jivan parichay was the absence of relevant details.
Harikesh patwari ka jivan parichay nevertheless is an subject that I know something about. This video for that reason should be relevant and of interest to you.
Are you enjoying too many videos? The take a break reminder lets you set a tip to take a break while seeing videos.
The Autoplay feature on YouTube makes it simpler to decide what to watch next. After you watch a YouTube video, it will immediately play another associated video based on your watching history.
--------------
REMAIN TUNED:
YouTube ? / haryanagold
Twitter - / rknain85
Insta 1 - / rknain85
Insta 2 - / nain_studios
follow us on Facebook - / nainstudios
Contact : 8901291550
email : [email protected]
So do yourself and your company a favor. Join today! You have all the realities so Click the Link above to start today!-.
#harikeshpatwari #haryanagold #futkadragni #nainragnicenter
हरियाणा के महान कवि पं हरिकेश पटवारी का जीवन परिचय पं हरिकेश पटवारी का जन्म 7 अगस्त 1898 को गांव धनौरी तहसील नरवाना जिला जींद में हुआ था और। धनौरी गांव दिल्ली-पटियाला राजमार्ग पर दाता सिंह वाला से 5 कि. मी. की दूरी पर है इनके पिता का नाम पं उमाशंकर व मां का नाम बसन्ती देवी था। उस समय धनौरी गांव पटियाला रियासत में पडता था। पं हरिकेश ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव धनौरी में और माध्यमिक शिक्षा खन्ना पंजाब से प्राप्त की। इसके बाद काफी समय तक संगरूर में लारी बस भी रखी जो आसपास के इलाकों में चलती थी। इसके बाद बस को बेच दिया गया इसी दौरान उन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया। फिर उन्होंने राजस्व विभाग में पटवारी के पद पर कार्य किया। उन्होंने इसके साथ साथ लेखन का कार्य भी किया।
अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ कलम के माध्यम से लड़ाई लड़ने वाले हिदी व उर्दू के विख्यात कवि हरिकेश की रचनाओं ने जहा गुलामी के दिनों में लोगो में देश प्रेम व समर्पण की भावना जागृत की वहीं उनकी रचनाएं आज कालेजों में उच्च शिक्षित युवाओं को जीवन जीने की राह दिखा रही है। अपने खून की स्याही से वतन के लिए कुर्बानी देने वाले कवि को राजनेताओं व अधिकारियों ने भूला दिया है। यही कारण है कि न तो हरिकेश पटवारी को राष्ट्र कवि का दर्जा दिया गया और न ही सरकार ने परिवारों को वो सम्मान दिया जिसके वे हकदार थे।
देश के लोगों में गुलामी की जंजीरो को तोड़ने का जज्बा पैदा करने पर अंग्रेजी हुकूमत ने इन्हे न केवल कठोर यातनाएं दी बल्कि कई मर्तबा जेल भी जाना पड़ा। लेकिन ये यातनाएं कवि की देश प्रेम की भावना को ठंडा नहीं कर पाई। कवि के मातृ भूमि के प्रति इस गहरे स्नेह और समर्पण भाव की स्वयं राष्ट्रपिता महात्मा गाधी, देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस जैसी नाम हस्तियों ने उस समय मुक्त कंठ से प्रशसा की थी।
उन्होंने अपनी पहली पुस्तक आजादी के ऊपर लिखि।
पंडित हरिकेश जी हाजिर जवाबी के लिए भी प्रसिद्ध थे, आपने कई भाषाओ में लेखन का कार्य भी किया।आजादी के बाद आपने हरियाणा के सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक परिवेश को बहुत विश्वसनीय ढंग से अपनी रचनाये प्रस्तुत की। रचनाओं में व्यक्त सच्चाई और सहज कला के कारण रागनियां लोकप्रिय हुईं। आपने लेखन काल में कई रचनाये लिखी, जिसमे से निम्नलिखित चार पुस्तके देहाती बुक स्टोर नरवाना द्वारा प्रकाशित हुई-
1 वैराग्य रत्नमाला 2 आजादी की झलक 3 हरिकेश पुष्पांजलि 4 प्रश्नोतरी(शंकराचार्य के सवाल)
पं हरिकेश पटवारी कई बार अपनी रचनाओं और उपदेशों को सुनाने के लिए आकाशवाणी दिल्ली से भी देहाती प्रोग्राम प्रस्तुत करते थे। सन 1952 में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के नरवााना आगमन के समय भी पं हरिकेश पटवारी ने अपनी रचनाऐ प्रस्तुत की। नेहरू ने भी उनकी बहुत प्रशंसा की ओर उन्हें बहुत सराहा गया।उसके बाद नेहरु जी ने पं हरिकेश पटवारी को दिल्ली आने का न्योता दिया।लेकिन लंबी बीमारी के कारण वे दिल्ली नहीं पहुच पाए और 18 फरवरी 1954 को पं हरिकेश पटवारी इस संसार से चल बसे।
सरकार ने उनकी रचना वैराग्य रत्न माला, आजादी की झलक, हरिकेश पुष्पाजंली, प्रश्नोत्तरी को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय बीए द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रम में शामिल कर उन्हें पुष्पाजंली अर्पित की थी। इसके साथ ही उनकी रचनाओं की रायलटी परिवार को देने की घोषणा की गई।
Повторяем попытку...
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео
-
Информация по загрузке: