मंगल शुक्र युति अतृप्त काम इच्छाएं
Автор: KISHOR ASTROLOGY
Загружено: 2019-06-02
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मंगल कालपुरुष की पत्रिका मे प्रथम,अष्टम तथा शुक्र द्वितीय,सप्तम भावो का प्रतिनिधित्व करते हैं |
मंगल जहां दैहिक शक्ति,ऊर्जा,उत्साह,जोश,युवा,पौरुष,रक्त,इच्छा,वासना,क्षत्रिय,अग्नितत्व,लाल रंग,उत्तेजना,हिंसा,उमंग,साहस इत्यादि का कारक होता हैं | वही शुक्र विवाह,वस्त्र,स्त्री,संभोग अथवा कामसुख,यौवन,जवानी का जोश,सौन्दर्य,प्रेमालाप,सुख,वैभव,सुंदरता,वीर्य,कामक्रीड़ा,जलतत्व,स्त्री व ब्राह्मण जाति,शयनग्रह,कामुकता आदि का कारक होता हैं |
स्पष्ट हैं की इन दोनों (मंगल व शुक्र) की युति कहीं ना कहीं इन सभी कारको पर शुभाशुभ प्रभाव अवश्य प्रदान करेगी |
शास्त्रो मे इन दोनों ग्रहो की युति का फल इस प्रकार से कहा गया हैं |
स्त्रियो का शौकीन,विलासी,गर्विष्ट,जुगाड प्रिय,अपने गुणो द्वारा समाज मे प्रधान,ज्योतिष या गणित जानने वाला,जुआरी,मिथ्याभाषी,दुष्ट,परस्त्रीगामी किन्तु समाज मे मान्य,गायों का स्वामी,पहलवान,दूसरों की स्त्रियो मे रत,जुआ खेलने वाला,बहस करने का शौकीन,झगड़ालू और चतुर होता हैं |
इन दोनों ग्रहो का पत्रिका मे संबंध अतृप्त काम इच्छाए देता हैं तथा इसे व्यभिचार का योग भी माना जाता हैं हमने काफी पत्रिकाओ मे इसे सत्य पाया हैं ऐसी पत्रिकाओ मे बिल क्लिंटन,अभिनेत्री जा जा गोबर,सलमान खान ,संजय दुत्त,अमिताभ बच्चन,मीना कुमारी,ज़ीनत अमान व चार्ली चेपलीन प्रमुख हैं |
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