SHRI SHIV TANDAVSTOTRAM - श्री शिवतांडव स्तोत्रम् - दुख-दर्द, शत्रु बाधा, ग्रह दोष, शनि दोष, शक्ति
Автор: Sanatan Sangrah
Загружено: 2025-12-18
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शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने से आत्मबल, साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है, मानसिक शांति मिलती है, सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, और जीवन के दुख-दर्द, शत्रु बाधा, और ग्रह दोष (जैसे शनि दोष) दूर होते हैं, जिससे व्यक्ति को शक्ति, सौंदर्य और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है, साथ ही यह रचनात्मकता और कलात्मक निपुणता भी बढ़ाता है।
शिव तांडव स्तोत्र के प्रमुख लाभ:
• आत्मबल और आत्मविश्वास में वृद्धि: यह स्तोत्र व्यक्ति के अंदरूनी शक्ति और आत्मविश्वास को बढ़ाता है।
• मानसिक शांति: मन के विकारों को दूर कर एकाग्रता और शांति प्रदान करता है।
• सकारात्मक ऊर्जा: नकारात्मक शक्तियों को दूर कर वातावरण को शुद्ध करता है।
• मनोकामना पूर्ति: सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
• शत्रु बाधा से मुक्ति: दुश्मनों से सुरक्षा मिलती है और उन पर विजय प्राप्त होती है।
• स्वास्थ्य और सौंदर्य: चेहरे पर तेज आता है और शारीरिक संतुलन बना रहता है।
• शनि दोष निवारण: कुंडली में शनि ग्रह के दुष्प्रभाव को कम करता है।
• कालसर्प और पितृ दोष: कालसर्प योग और पितृ दोष से राहत दिलाने में कारगर है।
• कलात्मक निपुणता: नृत्य, लेखन और अन्य कलाओं में प्रवीणता प्राप्त होती है।
• महादेव नृत्य, योग, और समाधि जैसी सिद्धियाँ प्रदान करते हैं।
कब और कैसे करें पाठ:
• ब्रह्म मुहूर्त (सुबह) या शाम के समय स्नान के बाद पाठ करना उत्तम माना जाता है।
• भगवान शिव की पूजा के बाद श्रद्धापूर्वक पाठ करें और प्रार्थना करें कि आपकी सभी बाधाएँ दूर हों।
शिव तांडव स्तोत्र के प्रमुख लाभ:
• आत्मबल और आत्मविश्वास में वृद्धि: यह स्तोत्र व्यक्ति के अंदरूनी शक्ति और आत्मविश्वास को बढ़ाता है।
• मानसिक शांति: मन के विकारों को दूर कर एकाग्रता और शांति प्रदान करता है।
• सकारात्मक ऊर्जा: नकारात्मक शक्तियों को दूर कर वातावरण को शुद्ध करता है।
• मनोकामना पूर्ति: सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
• शत्रु बाधा से मुक्ति: दुश्मनों से सुरक्षा मिलती है और उन पर विजय प्राप्त होती है।
• स्वास्थ्य और सौंदर्य: चेहरे पर तेज आता है और शारीरिक संतुलन बना रहता है।
• शनि दोष निवारण: कुंडली में शनि ग्रह के दुष्प्रभाव को कम करता है।
• कालसर्प और पितृ दोष: कालसर्प योग और पितृ दोष से राहत दिलाने में कारगर है।
• कलात्मक निपुणता: नृत्य, लेखन और अन्य कलाओं में प्रवीणता प्राप्त होती है।
• महादेव नृत्य, योग, और समाधि जैसी सिद्धियाँ प्रदान करते हैं।
कब और कैसे करें पाठ:
• ब्रह्म मुहूर्त (सुबह) या शाम के समय स्नान के बाद पाठ करना उत्तम माना जाता है।
• भगवान शिव की पूजा के बाद श्रद्धापूर्वक पाठ करें और प्रार्थना करें कि आपकी सभी बाधाएँ दूर हों।
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