Neelkanth Mahadev - Shia Bhakti Qawalli Song 2026 - Latest Songs
Автор: AudioRaja
Загружено: 2026-01-18
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यह गीत भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप को समर्पित है—उस क्षण को, जब समुद्र मंथन से निकले कालकूट विष को पीकर उन्होंने संपूर्ण सृष्टि की रक्षा की। यह केवल एक पौराणिक घटना नहीं, बल्कि त्याग, उत्तरदायित्व और निस्वार्थ बलिदान का शाश्वत संदेश है। नीलकंठ हमें सिखाते हैं कि सच्चा रक्षक वही होता है जो दूसरों के जीवन के लिए स्वयं कष्ट सहने को तैयार हो।
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आप अपने मनचाहे विषय पर कस्टम सॉन्ग आसानी से रिक्वेस्ट कर सकते हैं।
COMPLETE LYRICS
[Intro]
जब अमृत की चाह में ज़हर निकल आया,
देव और दानव, सब पर खौफ छा गया।
तब एक हाथ उठा, सब को बचाने के लिए...
वो जो वैरागी है, वही रक्षक है।
[Verse 1]
मंजर था भारी, सागर का मंथन जारी था,
लालच के पीछे, हर कोई शिकारी था।
पर अमृत से पहले, कालकूट का उदय हुआ,
ऐसा विष जिससे, सारा ब्रह्मांड भयभीत हुआ।
देवता काँपे, और असुरों के छूटे पसीने,
लगा कि अब ना बचेंगे, ये जीने के महीने।
सृष्टि की पुकार पे, वो कैलाश से आया,
मर्यादा और त्याग का, उसने मान बढ़ाया।
[Verse 2]
ना ही कोई शर्त रखी, ना ही कोई मांग की,
सृष्टि को बचाने की, उसने दिल में ठान ली।
हलाहल का प्याला, उसने हाथों में थाम लिया,
मौत को भी अपने, चरणों में विराम दिया।
पिया जो वो ज़हर, तो कंठ नीला पड़ गया,
महादेव का साहस, काल से भी लड़ गया।
रोक लिया विष को, उसने अपने ही गले में,
ठंडक पहुँचाई, ब्रह्मांड के हर एक कोने में।
[Hook]
नीला पड़ा है कंठ, पर दिल में सबके प्यार है,
ज़हर पी के बैठा जो, वही तो तारणहार है।
बोलो नीलकंठ महादेव, जय-जय त्रिपुरारी,
सृष्टि की रक्षा की, तेरी महिमा है न्यारी।
[Chorus]
विनाश को पी गया, जो अमृत बाँटने आया,
महाकाल ने अपना, अद्भुत रूप दिखाया।
त्याग की पराकाष्ठा, बलिदान का वो नाम है,
नीलकंठ के चरणों में, मेरा कोटि-कोटि प्रणाम है।
[Bridge]
दुनिया को अमृत चाहिए, पर विष कौन पिएगा?
दूसरों की खातिर, घूँट कड़वे कौन जिएगा?
शिव ने सिखाया, कि रक्षक वही होता है,
जो औरों के दुःख में, अपनी नींदें खोता है।
[Verse 3]
आज भी वो ज़हर, समाज में फैला है,
लालच और नफरत से, ये मन हुआ मैला है।
हमें भी तो अपने, भीतर का शिव जगाना होगा,
बुराई के ज़हर को, खुद ही पीना होगा।
नीलकंठ का कंठ, बस एक निशान नहीं,
त्याग के बिना, कोई महान नहीं।
भोले की भक्ति में, शक्ति अपार है,
विष को भी अमृत कर दे, ऐसा वो करतार है।
[Hook]
नीला पड़ा है कंठ, पर दिल में सबके प्यार है,
ज़हर पी के बैठा जो, वही तो तारणहार है।
बोलो नीलकंठ महादेव, जय-जय त्रिपुरारी,
सृष्टि की रक्षा की, तेरी महिमा है न्यारी।
[Outro]
विष तुम्हारा, अमृत सबका।
यही शिव है।
ओम नमः शिवाय।
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