MUNISUVRATJI BIRAAJE || ON OCCASION OF KORDA GAAM SAALGIRI || JAL STUDIO
Автор: Jal Studio
Загружено: 2026-01-04
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Описание:
SONG ARRANGEMENT: JAL MORVADIYA
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Lyrics :
गुजरात की धरती पे, ईक गाँव सदा ही छाजे,
कोरड़ा है वो नगरी जहाँ, मुनिसुव्रतजी बिराजे…
इस धन्यधरा पर सालों से, संयम शरनाई बाजे,
कोरड़ा है वो नगरी जहाँ, मुनिसुव्रतजी बिराजे…
हर साल ये नगरी सजती है, हर साल ध्वजा ये बदलती है,
भक्तों का मेला लगता है, मानो स्वर्ग यहीं पे उतरता है,
यहाँ जो दर्शन को आते हैं, प्रभु को इकबार निहारते हैं,
प्रभु नाम की धुन में खोकर, वो दुनिया बिसर ही जाते हैं,
है ठाठ यहाँ का अजब गजब, संग ढोल नगाड़ा बाजे,
कोरड़ा है वो नगरी जहाँ, मुनिसुव्रतजी बिराजे…
वो लोग नसीबों वाले थे, ये दृश्य जिन्होंने देखा था,
महा वद शातम , वो तिथि परम, जिस दिन हुई पावन प्रतिष्ठा,
प्रभु ढाई हाथ थे ऊँचे, और ऊँची उनकी प्रतिभा,
हर हृदय से नाद था गूँज उठा, जय जय मुनिसुव्रतजी दादा,
दादा गुरुदेव ओमकारसूरीजी का, डंका जहाँ पर बाजे,
कोरड़ा है वो नगरी जहाँ, मुनिसुव्रतजी बिराजे…
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