अन्यय चिंतन। प्रभु। का। करो। जीव। या मनुष्य का नहीं जिससे। सारे बंधन। मुक्त। हो जाओगे। 🙏🙏🙏🙏🙏
Автор: Shri Radha Nam Ras 01
Загружено: 2025-12-21
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हाँ, प्रभु चिंतन (ईश्वर के बारे में सोचना/भक्ति करना) से जीव (व्यक्ति) मोह, चिंता और कर्म-बंधन से मुक्त होकर जीवन को आनंदमय बना सकता है और परम मुक्ति (मोक्ष) पा सकता है, क्योंकि भगवान के वचनों पर चलना, उनके प्रति पूर्ण समर्पण, और निष्काम कर्म (बिना फल की इच्छा के कर्म) ही इस बंधन से निकलने का मार्ग हैं।
कैसे प्रभु चिंतन मुक्ति दिलाता है:
मन का एकाग्र होना: जब मन ईश्वर में लग जाता है, तो वह सांसारिक मोह-माया और इच्छाओं में नहीं भटकता, जिससे तनाव और दुख कम होते हैं।
सही जीवनशैली: प्रभु के वचनों के अनुसार जीने से सही-गलत का बोध होता है, और व्यक्ति गलत कर्मों से बचकर पवित्र जीवन जीता है, जिससे कर्म-बंधन कमजोर होते हैं।
समर्पण और भक्ति: भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण (मन, वचन, कर्म से) और उनके गुणगान से हृदय शुद्ध होता है, जिससे अहंकार और द्वेष मिटते हैं।
#भक्ति #आनंद #radheshyam 🙏🙏🙏🙏🙏
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