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वृहत् वात चिंतामणि ||Vrihat vat chintamaniरस लकवा, धनुर्वात, पक्षाघात की आयुर्वेदिक दवा

Автор: @ आयुर्वेद - Ayurveda

Загружено: 2024-10-11

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Описание: चिंतामणि रस एक आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से वायु विकारों, हृदय रोग, और मस्तिष्क संबंधित समस्याओं के उपचार के लिए उपयोग की जाती है। इसका निर्माण पारंपरिक आयुर्वेदिक तरीकों से किया जाता है और यह एक रसायन औषधि है, जिसे बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के भस्म और जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है।

चिंतामणि रस के लाभ:
वात रोगों में उपयोगी: यह औषधि वात दोष के संतुलन में मदद करती है और वातज विकारों जैसे कि गठिया, संधिवात, और पक्षाघात के उपचार में सहायक होती है।
हृदय रोगों में उपयोगी: हृदय के स्वास्थ्य को बनाए रखने और हृदय रोगों को ठीक करने में यह औषधि सहायक होती है।
मस्तिष्क को शक्ति प्रदान करना: यह मानसिक तनाव, चिंता, और अवसाद जैसी मानसिक समस्याओं में लाभकारी है। इसे मस्तिष्क के लिए शक्तिवर्धक माना जाता है।
पाचन में सुधार: यह औषधि पाचन तंत्र को मजबूत करने में भी मदद करती है और अपच, पेट फूलना, और अम्लपित्त जैसी समस्याओं को दूर करती है।
श्वसन संबंधी समस्याओं का इलाज: चिंतामणि रस श्वसन संबंधी विकारों जैसे अस्थमा, खांसी, और ब्रोंकाइटिस में लाभकारी है।
उर्जा और शक्ति में वृद्धि: यह औषधि शरीर को उर्जावान बनाती है और शारीरिक शक्ति में वृद्धि करती है।
सामग्री:
चिंतामणि रस बनाने में निम्नलिखित भस्मों और जड़ी-बूटियों का उपयोग होता है:

स्वर्ण भस्म: मस्तिष्क और हृदय को मजबूती देने के लिए
रजत भस्म: नर्वस सिस्टम को मजबूत करने के लिए
अभ्रक भस्म: शारीरिक कमजोरी को दूर करने के लिए
लौह भस्म: खून की कमी को पूरा करने के लिए
मुक्ता भस्म: श्वसन तंत्र के विकारों में
शुद्ध परद: संपूर्ण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए
शुद्ध गंधक: पाचन तंत्र को सुधारने के लिए
सेवन विधि:
चिंतामणि रस की खुराक का निर्णय डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए। आमतौर पर इसे दिन में दो बार 1-2 रत्ती (लगभग 125-250 मिलीग्राम) लिया जाता है, और इसे शहद, घी, या अदरक के रस के साथ सेवन किया जाता है।

सावधानियां:
इसे आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के बिना सेवन न करें।
गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे इसका सेवन न करें।
ओवरडोज से बचें, क्योंकि यह औषधि धातुओं से बनी होती है, जो अधिक मात्रा में लेने पर नुकसान पहुंचा सकती है।
इस औषधि का उपयोग चिकित्सक की निगरानी में ही करना चाहिए, क्योंकि यह एक शक्तिशाली औषधि है।

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वृहत् वात चिंतामणि ||Vrihat vat chintamaniरस लकवा, धनुर्वात, पक्षाघात की आयुर्वेदिक दवा

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