भारतीय संघ और उसका राज्य क्षेत्र: संवैधानिक ढांचा।। Article 1-4 । BPSC । Ssc । railway Bank । LAW।
Автор: Facts and theory
Загружено: 2026-03-03
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संघ एवं इसका क्षेत्र: संवैधानिक प्रावधान और राज्यों का उद्भव
यह दस्तावेज़ भारतीय संविधान के भाग I (अनुच्छेद 1 से 4) के तहत 'संघ एवं इसके क्षेत्रों' का एक विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसमें देश की राजनैतिक संरचना, राज्यों के पुनर्गठन की संसदीय शक्ति और स्वतंत्रता के पश्चात राज्यों के क्रमिक विकास का विवरण दिया गया है।
1. संवैधानिक आधार और संघ की प्रकृति
संविधान का अनुच्छेद 1 भारत को 'राज्यों के समूह' के बजाय 'राज्यों का संघ' के रूप में परिभाषित करता है। यह परिभाषा दो प्रमुख पहलुओं को स्पष्ट करती है: देश का नाम (इंडिया, जो कि भारत है) और राजपद्धति का प्रकार (संघीय)।
'राज्यों का संघ' बनाम 'संघीय राज्य'
डॉ. बी. आर. अंबेडकर के अनुसार, 'राज्यों का संघ' शब्द को 'संघीय राज्य' पर प्राथमिकता देने के दो मुख्य कारण थे:
भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है (जैसा कि अमेरिकी संघ में है)।
राज्यों को संघ से विभक्त होने या अलग होने का कोई अधिकार नहीं है।
यह पूरा देश एक इकाई है जो केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए विभिन्न राज्यों में विभाजित है।
भारतीय क्षेत्र का वर्गीकरण
अनुच्छेद 1 के अंतर्गत भारतीय क्षेत्र को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
1. राज्यों के क्षेत्र: संघीय व्यवस्था के सदस्य और केंद्र के साथ शक्तियों के बंटवारे में हिस्सेदार।
2. संघ क्षेत्र (केंद्रशासित प्रदेश): केंद्र सरकार द्वारा सीधे प्रशासित।
3. अधिगृहीत क्षेत्र: जिन्हें भारत सरकार द्वारा किसी भी समय (संधि, खरीद, उपहार, लीज या जीत के माध्यम से) अधिग्रहित किया जा सकता है।
2. संसद की पुनर्गठन संबंधी शक्तियाँ (अनुच्छेद 2 और 3)
संविधान संसद को भारतीय मानचित्र को पुनर्निर्धारित करने के लिए व्यापक अधिकार देता है।
अनुच्छेद मुख्य शक्ति विवरण
अनुच्छेद 2 नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना उन राज्यों से संबंधित जो वर्तमान में भारतीय संघ का हिस्सा नहीं हैं।
अनुच्छेद 3 वर्तमान राज्यों का पुनर्गठन राज्यों की सीमाएं बदलना, नाम बदलना, या दो/अधिक राज्यों को मिलाकर नया राज्य बनाना।
अनुच्छेद 4 विधायी प्रक्रिया अनुच्छेद 2 और 3 के तहत किए गए परिवर्तन अनुच्छेद 368 के तहत 'संविधान संशोधन' नहीं माने जाएंगे (साधारण बहुमत से पारित)।
महत्वपूर्ण सिद्धांत: भारत को "विभक्त राज्यों का अविभाज्य संघ" कहा जाता है। केंद्र सरकार किसी राज्य के अस्तित्व को समाप्त कर सकती है, लेकिन राज्य संघ को समाप्त नहीं कर सकते। इसके विपरीत, अमेरिका को "अविभाज्य राज्यों का विभाज्य संघ" कहा जाता है।
3. राज्यों के पुनर्गठन का इतिहास और समितियाँ
स्वतंत्रता के समय भारत में ब्रिटिश प्रांत और देशी रियासतें (552) थीं। जूनागढ़ (जनमत), हैदराबाद (पुलिस कार्यवाही) और कश्मीर (विलय पत्र) को छोड़कर शेष स्वेच्छा से भारत में शामिल हुए।
प्रमुख आयोग और उनकी सिफारिशें
आयोग/समिति वर्ष मुख्य सिफारिश/निष्कर्ष
धर आयोग (एस. के. धर) 1948 राज्यों का पुनर्गठन भाषायी आधार के बजाय प्रशासनिक सुविधा पर होना चाहिए।
JVP समिति (नेहरू, पटेल, सीतारमैया) 1949 भाषायी आधार पर पुनर्गठन को औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया।
फ़ज़ल अली आयोग 1953 भाषायी आधार को व्यापक रूप से स्वीकार किया, लेकिन 'एक राज्य एक भाषा' के सिद्धांत को नकारा।
नोट: 1953 में, पोट्टी श्रीरामुलु की 56 दिनों की भूख हड़ताल के बाद निधन के कारण, सरकार को भाषायी आधार पर पहले राज्य आंध्र प्रदेश के गठन के लिए मजबूर होना पड़ा।
4. 1956 के बाद निर्मित नए राज्य और संघ शासित क्षेत्र
राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के बाद राजनीतिक दबाव और भाषायी आकांक्षाओं के कारण कई नए राज्यों का निर्माण हुआ:
वर्ष राज्य/क्षेत्र विवरण
1960 गुजरात और महाराष्ट्र द्विभाषी बॉम्बे राज्य का विभाजन (गुजरात 15वाँ राज्य बना)।
1961 दादरा एवं नागर हवेली 10वें संशोधन द्वारा संघ शासित क्षेत्र घोषित।
1962 गोवा, दमन एवं दीव 12वें संशोधन द्वारा अधिग्रहित; गोवा 1987 में पूर्ण राज्य बना।
1963 नागालैंड असम से पृथक कर बनाया गया।
1966 हरियाणा, चंडीगढ़ पंजाब से अलग होकर हरियाणा 17वाँ राज्य बना।
1971 हिमाचल प्रदेश संघ शासित क्षेत्र से पूर्ण राज्य बना (18वाँ राज्य)।
1975 सिक्किम 36वें संशोधन द्वारा पूर्ण राज्य (22वाँ राज्य) बना।
2000 छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, झारखंड क्रमशः मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार से अलग हुए।
2014 तेलंगाना आंध्र प्रदेश के विभाजन से 29वें राज्य के रूप में उदय।
2019 जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पूर्व राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित किया गया।
5. विशेष कानूनी मामले और सीमा परिवर्तन
बेरूबाड़ी संघ मामला (1960): उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 3 के तहत संसद किसी भारतीय क्षेत्र को दूसरे देश को नहीं सौंप सकती। इसके लिए अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन अनिवार्य है (9वाँ संशोधन)।
100वाँ संविधान संशोधन (2015): भारत और बांग्लादेश के बीच क्षेत्रों का ऐतिहासिक आदान-प्रदान हुआ। भारत ने 111 विदेशी अंतःक्षेत्रों (Enclaves) को बांग्लादेश को सौंपा और 51 अंतःक्षेत्र प्राप्त किए।
नामों में परिवर्तन: संयुक्त प्रांत का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश (1950), मद्रास का तमिलनाडु (1969) और मैसूर का कर्नाटक (1973) किया गया। दिल्ली को 69वें संशोधन (1991) द्वारा 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र' का दर्जा दिया गया।
6. निष्कर्ष: राज्यों की वर्तमान स्थिति
1956 में भारत में 14 राज्य और 6 केंद्रशासित प्रदेश थे। विभिन्न पुनर्गठनों के परिणामस्वरूप, वर्तमान में भारत में 28 राज्य और 8 केंद्रशासित प्रदेश (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पुनर्गठन और दमन-दीव/दादरा-नागर हवेली के विलय के बाद के संदर्भ में) प्रभावी हैं।
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