कोर्लई किला : पुर्तगालियों का सबसे ताकतवर किला | Korlai Fort: The Strongest Fort of The Portuguese
Автор: Peepul Tree World
Загружено: 2021-10-28
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इस वीरान किले में कभी सत्तर तोप और आठ हज़ार घोड़े तैनात किए गए थे. कोंकण तट पर मौजूद ये कोर्लई किला है, जो एक जमाने में पुर्तगालियों का सबसे ताकतवर किला हुआ करता था.
मुंबई से 116 किलोमीटर दक्षिण में स्थित रायगढ़ जिले में मौजूद कोर्लई किला 2828 फीट ऊंचा है. अरब सागर से सटे हुए पहाड़ी पर ये किला रेवदंडा क्रीक और कोर्लई गाँव से घिरा हुआ है.
पंद्रहवीं शताब्दी के अंत में वास्को डीगामा के भारत तक व्यापारिक मार्ग खोजने के बाद, मलाबार से लेकर दीव तक समस्त भारतीय पश्चिमी तट पर पुर्तगालियों का सैन्य शक्ति के तौर पर विस्तार हुआ. इसी सिलसिले को आगे बढाते हुए, वसई से लेकर गोवा तक के इलाके की हिफाज़त के लिए अरब सागर को जोडती हुई रेवदंडा क्रीक पर मौजूद एक पहाड़ी पर कोर्लई किले का निर्माण सन 1521 में अहमदनगर सल्तनत की इजाज़त से हुआ. यहाँ हिफाज़त से साथ-साथ, पुर्तगालियों की तिजारत भी सक्रिय रूप से हुआ करती थी. किले की सुरक्षा के लिए बंदूकों के जगह रखने के लिए करीब 305 युद्धपोत और एक विशाल बारूदखाने का भी निर्माण किया गया था. यहाँ पर मौजूद सात बुर्ज कई मशहूर इसाई संतों के नाम पर रखे गए हैं. पुर्तगाली सैनिकों के आध्यात्मिक ज़रुरत के लिए यहाँ एक चर्च भी बनवाया गया था.
मोरो और कैसल कार्लियु जैसे नामों से जाने गए इस किले को पुर्तगालियों के सबसे बेहतरीन और ताक़तवर किलों में गिना जाता था, जिसका ज़िक्र उस जमाने में आए कई पुर्तगाली इतिहाकार और प्रशासकों के लेखों में पाया जाता है. किले के निर्माण के कई सालों तक यहाँ पुर्तगालियों और अहमदनगर सल्तनत के बीच कई जंगें लड़ीं गईं, जिसका सिलसिला सत्रहवीं शताब्दी के मध्य तक कायम रहा, जब दक्कन में मराठों का उदय हुआ. आखिरकार पेशवा बाजीराव प्रथम के भाई चिमाजी अप्पा के नेतृत्व में मराठों से जारी जंग के कई वर्षों बाद, सन 1739 में ये किला आखिरकार मराठों के हाथ आया, जिन्होंने 79 सालों तक इसको अपने कब्ज़े में रखा. चौथे एंग्लो-मराठा युद्ध के बाद कोर्लई किला सन 1818 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन आया. सन 1858 के बाद, जब भारत के सत्ता की बागडोर अंग्रेज़ सरकार के हाथ आई, तब ये किला वीरान रहा. 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, कोर्लई किला भारतीय पुरातत्व विभाग के तहत आया.
किले के मज़बूत दीवारों के भीतर सैनिकों के लिए बने बैरक, तोपखाने, चर्च और कई प्रशासनिक इमारतों जैसे कई स्थानों के अवशेष के साथ-साथ, अरब सागर और कोर्लई गाँव के दिलकश नज़ारे भी देखे जा सकते हैं.
आज कोर्लई किला पुर्तगालियों की सैन्य शक्ति और स्थापत्य कौशल के अद्भुत मिश्रण के तौर पर, हर सैलानी को मंत्रमुग्ध करता है.
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