बुलेट ट्रेन परियोजना: अहमदाबाद में स्वदेशी स्टील ब्रिज का निर्माण
Автор: ABCD 2डे
Загружено: 2026-02-03
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यह समाचार स्रोत मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत अहमदाबाद में एक विशाल स्टील ट्रस ब्रिज के निर्माण कार्य के सफल समापन की जानकारी देता है। 'मेक इन इंडिया' पहल के अंतर्गत स्वदेशी रूप से निर्मित यह 100 मीटर लंबा पुल गुजरात में स्थापित होने वाला 13वां प्रमुख स्टील ढांचा है। विशेष रूप से, इस पुल को एक भूमिगत मेट्रो सुरंग के ऊपर सुरक्षित रूप से तैयार किया गया है ताकि मौजूदा शहरी परिवहन बुनियादी ढांचे पर कोई अतिरिक्त भार न पड़े। लगभग 1,098 मीट्रिक टन वजनी इस संरचना का निर्माण महाराष्ट्र के वर्धा में किया गया था, जो भारतीय रेलवे की आधुनिक और उच्च गुणवत्ता वाली इंजीनियरिंग क्षमता को प्रदर्शित करता है। यह उपलब्धि न केवल स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देती है, बल्कि भविष्य की हाई-स्पीड रेल यात्रा के लिए एक सुरक्षित और टिकाऊ मार्ग भी सुनिश्चित करती है।
बुलेट ट्रेन परियोजना में 'मेक इन इंडिया' का क्या महत्व है?
मेट्रो टनल के ऊपर स्टील ब्रिज बनाना चुनौतीपूर्ण क्यों था?
इस परियोजना में यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या उपाय किए गए हैं?
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में 'मेक इन इंडिया' पहल का सबसे बड़ा महत्व स्वदेशी विनिर्माण क्षमताओं (indigenous manufacturing capabilities) को प्रदर्शित करना और मजबूत करना है। हाल ही में अहमदाबाद में पूरा किया गया 100 मीटर लंबा स्टील ब्रिज इस पहल की सफलता का एक प्रत्यक्ष प्रमाण है।
स्रोतों के अनुसार, इस परियोजना में 'मेक इन इंडिया' के महत्व को इन मुख्य बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:
स्थानीय निर्माण: 1,098 मीट्रिक टन वजनी इस विशाल स्टील ब्रिज का निर्माण विदेश में नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के वर्धा स्थित एक कार्यशाला में किया गया था। इसका निर्माण भारत में ही किया जाना और ट्रेलरों के जरिए इसे साइट तक पहुँचाना भारत की औद्योगिक क्षमता को उजागर करता है।
व्यापक भागीदारी: गुजरात में बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए कुल 17 स्टील पुलों की योजना बनाई गई है, जिनमें से यह 13वां स्टील ब्रिज है जो पूरा हो चुका है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत में हाई-स्पीड रेल के लिए आवश्यक जटिल संरचनाओं का निर्माण बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
जटिल इंजीनियरिंग क्षमता: यह 'मेक इन इंडिया' संरचना केवल सामान्य निर्माण नहीं है, बल्कि इंजीनियरिंग की दृष्टि से बेहद जटिल है। इसे भूमिगत मेट्रो टनल के ऊपर बनाया गया है, जिसके लिए विशेष स्टील ट्रस ब्रिज डिज़ाइन की आवश्यकता थी ताकि मेट्रो पर भार न पड़े।
गुणवत्ता और सुरक्षा: इस स्वदेशी निर्माण में गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा गया है, जिसमें लगभग 45,186 उच्च शक्ति वाले बोल्टों (टीटीएचएस) का उपयोग और सी5 सिस्टम पेंटिंग शामिल है, जो यात्रियों के लिए सुरक्षित और टिकाऊ बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करता है।
संक्षेप में, यह परियोजना भारतीय रेलवे के सुरक्षित और आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमों को रेखांकित करती है।
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