Baba Mohan Ram Mandir Full History | Rajasthan | बाबा मोहन राम मंदिर का पूरा इतिहास | राजस्थान |
Автор: Chale Ghumne
Загружено: 2022-07-11
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Baba Mohan Ram Mandir Full History | Rajasthan | बाबा मोहन राम मंदिर का पूरा इतिहास | राजस्थान |
बाबा मोहनराम मंदिर काली खोली मिलकपुर ( Bhiwadi, Rajasthan )
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बाबा मोहन राम की दूज कब की है 2021 September?
बाबा मोहन राम की दूज कब की है 2022?
बाबा मोहन राम की जाति क्या थी?
बाबा मोहन राम का मेला कब लगता है?
बाबा की दूज कब है?
भगवान राम के बाबा का नाम क्या था?
बाबा मोहन कौन थे?
बाबा मोहन दास कौन थे?
बाबा मोहन राम का व्रत कैसे किया जाता है?
बाबा की बीज कब है 2022 में?
इस महीने की दूज कब की है?
खोली कहां है?
जन जन की आस्था का केन्द्र बाबा मोहनराम मंदिर देहली एनसीआर क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक स्थल है। औद्योगिक नगरी भिवाड़ी के हदृय स्थल पर स्थित मिलकपुर गांव एंव नजदीक अरावली की पहाडिय़ां जिन्हे कालीखोली की पहाड़ी कहा जाता है पर बाबा की पवित्र गुफा है । दोनो स्थानों पर आज भव्य मंदिर बने है। दोनो मंदिरों में करीब 380 वर्ष से ्रनिरन्तर जल रही अखण्ड ज्योति के दर्शन कर मनौति मांगने से ही, श्रद्धालुओं के हर मनोरथ पूर्ण होते है। यहां हर माह कृष्ण पक्ष की दोयज तिथि पर मेले का आयोजन होता है। होली एंव रक्षा बंधन पर्व पर तीन दिवसीय लख्खी मेलों का आयोजन होता है। इन मेलों में देशभर से आएं लाखों श्रद्धालु बाबा की पवित्र ज्योति के दर्शन कर मनौति मांगते है। कुछ वर्ष पूर्व कालीखोली की पहाड़ी के चारों ओर परिक्रमा के लिए मार्ग बना दिया गया है। यहां सैकड़ों लोग बाबा की परिक्रमा लगा कर सूकून प्राप्त करते है। मंदिर ट्रस्ट बनने के बाद क्षेत्र का विकास निरन्तर जारी है।
बाबा मोहनराम का यह तीर्थ स्थल, राजस्थान राज्य के अलवर जिले के, भिवाड़ी शहर में बस स्टैण्ड से करीब एक किलोमीटर दूरी पर, मिलकपुर गांव में स्थित है। यहां बाबा का विशाल मंदिर बना है। मंदिर में बाबा की अखण्ड ज्योति ,विगत 380 वर्ष से निरन्तर जल रही है। यहां श्रद्धालुओं के ठहरने व भोजन प्रशाद की उत्तम व्यवस्था, निरन्तर बनी रहती है। मिलकपुर मंदिर से करीब तीन किलोमीटर दूरी पर, कालीखोली की पहाड़ी पर स्थित है ये बाबा का मुख्य मंदिर । मंदिर में स्थित गुफा के द्वार पर, बाबा की अखण्ड ज्योति निरन्तर प्रज्जवलित हो रही है। मंदिर से ऊपर की ओर, पथरीले रास्ते से होकर श्रद्धालु, पहाड़ी पर स्थित जोहड़ पर जाते है। मान्यता है कि इस प्राकृतिकजोहड़ में स्नान करने से ही अनेक रोग दूर हो जाते है। जोहड़ से दक्षिण की और ढलान पर ,एक स्थान पर बाबा के घोड़े के खुर के, 12 निसान बने हुवे है। नीचे की और एक स्थान पर बनी है शेषनाग की गुफा। यहां तीन विशाल पत्थर , प्राकृतिक रूप से इस प्रकार जुड़े है मानो शेषनाग ने फन फैला रखा है। ये सभी स्थान मोहनराम बाबा के स्मृति चिन्ह । नवनिर्मित परिक्रमा मार्ग में पहाड़ी पर एक स्थान पर एक सिला है, जिसे सिला बाजणी कहा जाता है। मान्यता है कि प्राचीन काल में, क्षेत्र में कोई संकट आने पर इस सिला से विशेष आवाजें आती थी, जिसे सुनकर ग्रामवासी सर्तक हो जाते थे। मान्यता है कि बाबा की अखण्ड ज्योति के समक्ष ,श्रद्धा एंव विश्वास से मांगी गई ,हर मनोकामना को बाबा मोहनराम पूर्ण करते है।
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