श्री 108 सिद्ध चक्र महामण्डल विधान एवं रत्न .श्रावका | श्लोक.18.आयोजन 26 फरवरी 2026 से 3 मार्च 2026
Автор: VidyaSoumyaDhara – Muni Soumyasagar Ji
Загружено: 2026-02-25
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जैन धर्म के सबसे प्रभावशाली और प्राचीन विधानों में से एक 'सिद्धचक्र महामंडल विधान' का फल अनंत है। जब भक्त मंडल पर अर्घ्य समर्पित करते हैं, तो वह केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि अपनी आत्मा को अष्ट कर्मों से मुक्त करने का पुरुषार्थ होता है।
मुनि श्री सौम्यसागर जी महाराज के मंगल प्रवचनों और कुशल मार्गदर्शन में होने वाले इस महायज्ञ में सम्मिलित होकर अपने जीवन को धन्य बनाएं।
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