आत्मग्लानि के भाव से कैसे बचा जाए....?? || H.H. Shree Shivkrupanand Swamiji ||
Автор: Gurutattva MP Official
Загружено: 2026-03-08
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आत्मग्लानि के भाव से कैसे बचा जाए....?? || H.H. Shree Shivkrupanand Swamiji ||
कभी भी हमें हमारी आत्मा के विरोध में जाकर कोई काम नहीं करना चाहिए चाहे हमें चाहे रिश्तेदार परेशान करें या हमारे मित्र हम पर दबाव डालें हमारे आत्मा उसे कार्य को करने के लिए मना कर रही है तो किसी भी कीमत पर हमें वह कार्य नहीं करना चाहिए क्योंकि जब उसे कार्य करने के बाद उसके बुरे परिणाम सब सामने आते हैं तो हमारे मित्र रिश्तेदार सब भाग जाते हैं रह जाती है केवल हमारी आत्मा और फिर हमारी आत्मा की कैसे चलती रहती है मैं तेरे को मना किया था फिर तूने यह क्यों किया और इस कैसेट से बचने का कोई मार्ग नहीं है फिर आप चाहे किसी भी स्थान पर चले जाओ वह आत्मा आपके ही भीतर है और वह कैसे आपके भीतर चलती ही रहेगी इसलिए कभी भी आत्मा के विरोध में जाकर काम नहीं करना चाहिए।
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