क्या इंसान की फितरत बदल सकती है? | कुत्ते की पूँछ | हिंदी कहानी
Автор: AMAR KATHA ( अमर कथा )
Загружено: 2026-02-23
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आज की प्रस्तुति है हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध व्यंग्यात्मक कहानी “कुत्ते की पूँछ” — लेखक राजेंद्र यादव।
यह कहानी समाज और इंसान की आदतों पर एक गहरा कटाक्ष करती है।
क्या किसी की जड़ हो चुकी प्रवृत्ति बदली जा सकती है?
क्या सुधार केवल प्रयास से संभव है, या कुछ स्वभाव कभी नहीं बदलते?
इस मार्मिक और विचारोत्तेजक कहानी में लेखक ने बेहद सरल घटना के माध्यम से समाज की मानसिकता और मनुष्य के स्वभाव पर तीखा व्यंग्य किया है। कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है कि बदलाव की बात करने वाला समाज स्वयं कितना बदलना चाहता है।
👉 वीडियो को अंत तक देखें और कमेंट में बताएं —
क्या “आदत” सच में बदल सकती है?
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📚 About the Author
राजेंद्र यादव हिंदी साहित्य के प्रमुख कथाकार और संपादक थे। उनकी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ, मनोवैज्ञानिक गहराई और प्रगतिशील विचारधारा स्पष्ट दिखाई देती है।
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