प्रथम चौबीसी-श्री ऋषभ प्रभु स्तवन/1st Choubisi ...Shree Rishabh prabhu#
Автор: भक्तामर कंठीकरण
Загружено: 2024-01-29
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जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्म संघ के एकादशमाधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमणजी के इंगितानुसार चौबीसी कंठीकरण का महान लक्ष्य।
चौबीसी क्रमांक- 1
श्री ऋषभ प्रभु स्तवन
रचयिता-श्रीमज्जयाचार्य(चतुर्थ आचार्य)
स्वर-श्रीमती करुणा भंसाली,वडोदरा
प्रस्तुति-भक्तामर कंठीकरण टीम
प्रणमूं प्रथम जिनन्द नैं जय जय जिन चंदा ।।
वन्दू बेकर जोड़ नैं, जुग आदि जिनिन्दा।
कर्म-रिपु-गज ऊपरै, मृगराज मुनिन्दा ।।१।।
अनुकूल प्रतिकूल सम सही, तप विविध तपंदा।
चेतन तन भिन लेखवी, ध्यान शुकल ध्यावंदा ।।२।।
पुद्गल - सुख अरि पेखिया, दुख हेतु भयाला।
विरक्त चित विघट्यो इसो, जाण्या प्रत्यक्ष जाला ।।३।।
संवेग- सरवर झूलता, उपशम-रस लीना।
निंदा - स्तुति सुख-दुःख में, समभाव सुचीना ।।४।।
वासी चंदन समपर्णे, थिर-चित्त जिन ध्याया ।
इम तन-सार तजी करी, प्रभु केवल पाया ।।५।।
हूं बलिहारी तांहरी वाह! वाह!! जिनराया।
उवा दिशा किण दिन आवसी, मुझ मन ऊम्हाया ।।६ ।।
उगणीसै सुदि भाद्रवै, दशमी दीतवारं ।
ऋषभदेव रटवै करी, हुओ हरष अपारं ।। ७ ।।
लय: ऐसे गुरु किम पाइयै
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